Monday, 25 October 2021, 12:57 AM

उपदेश

जीवन का अर्थ बताती है अर्थी

Updated on 20 October, 2021, 6:15
जीवन भर व्यक्ति इसी सोच में उलझा रहता है कि उसका परिवार है, बीबी बच्चे हैं। इनके लिए धन जुटाने और सुख-सुविधाओं के इंतजाम में हर वह काम करने के लिए तैयार रहता है जिससे अधिक से अधिक धन और वैभव अर्जित कर सके। अपने स्वार्थ के लिए व्यक्ति दूसरों... Read More

दान और परोपकार से घटता नहीं है धन

Updated on 19 October, 2021, 6:15
सभी धर्मों में कहा गया है कि दान करो। दान करने से धन घटता नहीं है बल्कि आपका धन बढ़ता है। लेकिन समस्या यह है कि लोग धन बढ़ने का तात्पर्य यह समझते हैं कि आज आप सौ रूपये कमाते हैं तो कल हजार रूपये कमाने लगेंगे। शास्त्रों में मुद्रा... Read More

दया करने वालों की जय-जयकार होती है

Updated on 18 October, 2021, 6:15
हर व्यक्ति अधिक से अधिक धन कमाने के पीछे व्यवहारिकता एवं मानवीय मूल्यों को भूलता जा रहा है। रास्ते में अगर कोई मजबूर व्यक्ति दिख जाए तो कोई बेबसी प्रकट करने के लिए दो पल रूक जाए यही बड़ी बात होती है। बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो किसी... Read More

भक्त के भीतर रहते हैं कृष्ण

Updated on 17 October, 2021, 6:00
जब भगवान चैतन्य बनारस में हरे कृष्ण महामंत्र के कीर्तन का प्रवर्तन कर रहे थे, तो हजारों लोग उनका अनुसरण कर रहे थे। तत्कालीन बनारस के अत्यंत प्रभावशाली और विद्वान प्रकाशानंद सरस्वती उनको भावुक कहकर उनका उपहास करते थे। कभी-कभी भक्तों की आलोचना दार्शनिक यह सोचकर करते हैं कि भक्तगण अंधकार... Read More

द्वंद्व के बीच शांति की खोज

Updated on 15 October, 2021, 6:45
केवल ज्ञान की बातें करों। किसी व्यक्ति के बारे में दूसरे व्यक्ति से सुनी बातें मत दोहराओ।  जब कोई व्यक्ति तुम्हें नकारात्मक बातें कहे, तो उसे वहीं रोक दो, उस पर वास भी मत करो। यदि कोई तुम पर कुछ आरोप लगाये, तो उस पर वास न करो। यह जान... Read More

अपूर्णता से पूर्णता की ओर

Updated on 10 October, 2021, 6:00
मनुष्य का बाह्य जीवन वस्तुत: उसके आंतरिक स्वरूप का प्रतिबिम्ब मात्र होता है। जैसे ड्राइवर मोटर की दिशा में मनचाहा बदलाव कर सकता है। उसी प्रकार, जीवन के बाहरी ढर्रे में भारी और आश्चर्यकारी परिवर्तन हो सकता है। वाल्मीकि और अंगुलिमाल जैसे भयंकर डाकू क्षण भर में परिवर्तित होकर इतिहास... Read More

जीवन : परमात्मा का अनमोल उपहार

Updated on 9 October, 2021, 6:15
जीवन परमात्मा का अनमोल उपहार है। यह स्वयं ही इतना दिव्य, पवित्र और परिपूर्ण है कि संसार का कोई भी अभाव इसकी पूर्णता को खंडित करने में असमर्थ है। आवश्यकता यह है कि हम अपने मन की गहराई से अध्ययन कर उसे उत्कृष्टता की दिशा में उन्मुख करें।  ईर्ष्या, द्वेष,... Read More

क्या है शुद्ध अहिंसा!

Updated on 6 October, 2021, 6:00
गांधी जी ने अपने जीवन में अहिंसा के विविध प्रयोग किए। वे एक वैज्ञानिक थे। उनका जीवन प्रयोगशाला था। उनका प्रारंभिक और अंतिम साहित्य देखने से यह तथ्य भलीभांति स्पष्ट हो जाता है। बड़े जीव की सुरक्षा के लिए छोटे जीव को मारने में वे पाप बताते थे। खती को... Read More

जीवन में विचार की आवश्यकता

Updated on 4 October, 2021, 6:00
कुटिल एवं असत्य विचार से मुक्ति का सरल उपाय सुविचार की भावना दृढ़ करना है। शांतिदायक सुविचार की गंगा प्रवाहित करने पर ही हम मानसिक दुर्बलता से मुक्त हो सकते हैं। प्रत्येक विचार अंत:करण में एक मानसिक मार्ग का निर्माण करता है। हमारी समस्त आदतें ऐसे ही मानसिक मार्ग हैं,... Read More

क्षमा भाव आत्मसात करें

Updated on 3 October, 2021, 6:15
बुद्धि का अर्थ है नीर-क्षीर विवेक करने वाली शक्ति और ज्ञान का अर्थ है आत्मा तथा पदार्थ को जान लेना। ज्ञान का अर्थ है आत्मा तथा भौतिक पदार्थ के अन्तर को जानना। आधुनिक शिक्षा में आत्मा के विषय में कोई ज्ञान नहीं दिया जाता, केवल भौतिक तत्वों तथा शारीरिक आवश्यकताओं... Read More

कन्या राशि प्रवेश करेगा सूर्य; इस दिन पूजा और स्नान दान की परंपरा,

Updated on 16 September, 2021, 13:57
17 सितंबर, शुक्रवार को सूर्य राशि बदलकर कन्या में आ जाएगा। इसलिए इस दिन कन्या संक्रांति मनाई जाएगी। इस पर्व पर स्नान, दान और पूजा-पाठ करना शुभ माना गया है। कन्या संक्रांति को विश्वकर्मा पूजा दिवस के रूप में भी मनाते हैं। दक्षिण भारत में ये पर्व बहुत ही खास... Read More

कैंची काटती है, सुई जोड़ती है 

Updated on 16 September, 2021, 6:15
कैंची काटती (तोड़ती) है और सुई जोड़ती है। यही कारण है कि तोड़ने वाली कैंची पैर के नीचे पड़ी रहती है और जोड़ने वाली सुई सिर पर स्थान पाती है। इसलिए मनुष्य का यही धर्म है कि इनसान को जोड़े न कि तोड़े। उन्होंने सास-बहू में एका होने का आह्वान... Read More

सफलता पाने के लिए क्या है जरूरी, जानें यहां!

Updated on 15 September, 2021, 6:45
धर्म के साथ हर किसी के जीवन में सफलता अहम होती है। बल्कि कहा जाता है इसे पाने के लिए ही लोग अपने जीवन में कड़ी मेहनत करते हैं। इतना ही नहीं बल्कि लोग अपनी तरफ से हर तरह का संभव प्रयास करते हैं जिससे वो अपने जीवन में सफलता... Read More

अपने पद का दुरुपयोग करना सही नहीं

Updated on 15 September, 2021, 6:30
धर्म के साथ घटना उस समय की है जब शास्त्री जी गृहमंत्री थे। यह तो सब जानते हैं कि शास्त्री जी बहुत सादगी पसंद और मितव्ययी थे। वह अपने और परिवार के ऊपर एक भी पैसा अनावश्यक नहीं खर्च करते थे। नियमों का कड़ाई से पालन करना उनकी आदत थी। एक... Read More

सम्मान देने से सम्मान बढ़ता है

Updated on 15 September, 2021, 6:15
धर्म के साथ सम्राट अशोक एक बार अपने मंत्रियों के साथ कहीं जा रहे थे, तभी रास्ते में उनको एक भिखारी दिखाई दिया। सम्राट अपने रथ से नीचे उतरे और उस भिखारी के पास जाकर अपने सिर को बड़ी ही नम्रता के साथ उसके सामने झुकाया और फिर आगे बढ़... Read More

अगर हमारे पास धन नहीं है तो दूसरों को प्रसन्नता तो बांट ही सकते हैं

Updated on 11 September, 2021, 12:25
कहानी - श्रीराम, लक्ष्मण और सीता का वनवास चल रहा था। वे जंगल-जंगल घूम रहे थे। कई विषयों पर लक्ष्मण और सीता जी के साथ श्रीराम बातें करते थे। वन में जहां कहीं भी ऋषियों के आश्रम दिखते थे, वहां ये तीनों चले जाते थे। एक बार साधु-संतों से बातचीत कर... Read More

अधर्म से कमाया गया भोजन

Updated on 9 September, 2021, 14:22
कहानी - महाभारत का युद्ध चल रहा था। 9 दिन बीत चुके थे। दुर्योधन ने भीष्म पितामह से शिकायत करते हुए कहा, 'आप ठीक से युद्ध नहीं कर रहे हैं। हमारे पक्ष के कई राजा मारे गए हैं। मेरे कई भाई मारे जा चुके हैं, लेकिन अब तक एक भी... Read More

सत्ता-संपदा का उन्माद

Updated on 14 August, 2021, 6:00
मनुष्य विचारशील प्राणी है, विवेकशील प्राणी है। उसके पास बुद्धि है, शक्ति है। वह अपनी बुद्धि का उपयोग करता है, चिंतन के हर कोण पर रुकता है, विवेक को जगाता है, शक्ति का नियोजन करता है और संसार के अन्य प्राणियों से बेहतर जीवन जीता है। जीने के लिए वह... Read More

जीवन के चार आधार

Updated on 12 August, 2021, 6:00
सुसंस्कारिता के चार आधार हैं- समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी। इन्हें आध्यात्मिक-आंतरिक वरिष्ठता की दृष्टि में उतना ही महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए जितना शरीर के लिए अन्न, जल, वस्त्र और निवास अनिवार्य समझा जाता है। समझदारी का अर्थ है- दूरदर्शी विवेकशीलता अपनाना। आमतौर से लोग तात्कालिक लाभ को सब कुछ... Read More

भोलेनाथ को जहरीला धतूरा चढ़ाने का मतलब ये कि अपने मन की कड़वाहट और जहर भी त्याग दें

Updated on 10 August, 2021, 17:03
भगवान शिव का श्रंगार बहुत ही रहस्यमयी और सबसे अलग है। उसमें नाग, भस्म, जहरीले और जंगली फूल और पत्ते शामिल हैं। ऐसा श्रंगार बताता हैं कि भगवान शिव उन सभी को भी अपनाते हैं। जिसे लोगों ने अपने से दूर कर रखा हो। यानी जो चीजें किसी काम की... Read More

हमारे लिए बोली गईं बुरी बातों पर ध्यान देंगे तो हमारे निर्णयों पर गलत असर हो सकता है

Updated on 9 August, 2021, 18:19
कहानी - बालक ध्रुव तप करने के लिए जंगल में जा रहे थे। उनकी मां सुनीति ने उनसे कहा था, 'तुम्हारी सौतेली मां सुरुचि ने तुम्हें पिता की गोद में बैठने से रोका तो तुम्हारा मन व्यथित होना ठीक है। भगवान को प्राप्त करो तो पिता की गोद में चढ़... Read More

ध्यान से खुल जाते हैं आत्मा के सारे चक्र  

Updated on 8 August, 2021, 6:00
उपदेशों और सिद्धांतो की इतनी भरमार है कि परमात्मा को अर्थात अपने जीवन के परम लक्ष्य को ढूंढना घास में से सुई खोजने के बराबर हो गया है। कुछ लोगों के लिए आध्यात्मिकता, माया से मुक्त होने का साधन है तो कुछ लोगों के लिए यह तप और भक्ति से... Read More

'थुकदम’ पर शोध खोलेगा जीवन-मृत्यु का रहस्य 

Updated on 7 August, 2021, 6:00
गीता में कहा गया है कि शरीर तो एक पुतला मात्र है इसमें मौजूद आत्मा जीव है। यह जिस शरीर में होता है उस शरीर के गुण, कर्म और अपेक्षा के अनुरूप मृत्यु के बाद नया शरीर धारण कर लेता है। आत्मा न तो जन्म लेता है और न इसकी... Read More

दूसरों के दुख से अपना दुख ज्यादा बेहतर

Updated on 3 August, 2021, 6:00
एक कहावत है 'राजा दुखी, प्रजा दुखी सुखिया का दुख दुना।' कहने का अर्थ यह है कि संसार में जिसे देखो वह अपने को दुखी ही कहेगा। राजा का अपना दुख है, प्रजा का अपना और जिसे आप सुखी माने बैठें हैं उससे पूछ कर देंखेंगे तो वह भी अपने... Read More

लक्ष्य के प्रति समर्पण जरूरी

Updated on 30 July, 2021, 6:45
राइट बंधुओं ने पहली बार 9 नव बर, 1904 को 5 मिनट से ज्यादा देर तक हवा में उड़ान भरी थी। हवाई जहाज का आविष्कार करने वाले ऑॢवल और विल्बर राइट बचपन से ही कल्पनाशील थे। दोनों ने कल्पनाओं की उड़ान में हवाई जहाज बनाने का सपना देखना शुरू कर... Read More

साधना और सुविधा

Updated on 30 July, 2021, 6:00
आसक्ति के पथ पर आगे बढ़ने वाले अपनी आकांक्षाओं को विस्तार देते हैं। उनकी इच्छाओं का इतना विस्तार हो जाता है, जहां से लौटना संभव नहीं है। उस विस्तार में व्यक्ति का अस्तित्व विलीन हो जाता है। फिर वह अपने लिए नहीं जीता। उसके जीवन का आधार पदार्थ बन जाता... Read More

अंग्रेज़ी सत्ता और नैतिकता

Updated on 26 July, 2021, 6:00
सत्ता के संचालन में शक्ति की अपेक्षा रहती है या नहीं, यह एक बड़ा प्रश्न है। शक्ति दो प्रकार की होती है- नैतिक शक्ति और उपकरण शक्ति। नैतिक शक्ति के बिना तो व्यक्ति सही ढंग से प्रशासन कर ही नहीं सकता। उपकरण शक्ति का जहां तक प्रश्न है, एक सीमा... Read More

इच्छाओं को समर्पित करते जाओ 

Updated on 25 July, 2021, 6:00
सभी इच्छाएं खुशी के लिए होती हैं। इच्छाओं का लक्ष्य ही यही है। किंतु इच्छा आपको कितनी बार लक्ष्य तक पहुंचाती है? इच्छा तुम्हें आनंद की ओर ले जाने का आभास देती है, वास्तव में वह ऐसा कर ही नहीं सकती। इसीलिए इसे माया कहते हैं। इच्छा कैसे पैदा होती... Read More

नर या नारायण कौन थे 'राम' 

Updated on 23 July, 2021, 6:00
श्रीराम पूर्णत? ईश्वर हैं। भगवान हैं। साथ ही पूर्ण मानव भी हैं। उनके लीला चरित्र में जहां एक ओर ईश्वरत्व का वैचित्रमय लीला विन्यास है, वहीं दूसरी ओर मानवता का प्रकाश भी है। विश्वव्यापिनी विशाल यशकीर्ति के साथ सम्यक निरभिमानिता है। वज्रवत न्याय कठोरता के साथ पुष्यवत प्रेमकोमलता है। अनंत... Read More

दिव्यता की विविधता

Updated on 20 July, 2021, 6:00
ईश्वर ने दुनिया की छोटी-छोटी खुशियां तो तुम्हें दे दी हैं, लेकिन सच्चा आनन्द अपने पास रख लिया है। उस परम आनन्द को पाने के लिए तुम्हें उनके ही पास जाना होगा। ईश्वर को पाने की चेष्टा में निष्कपट रहो। एक बार परम आनन्द मिल जाने पर सब-कुछ आनन्दमय है।... Read More