Sunday, 20 September 2020, 3:58 AM

उपदेश

अनमोल हैं कड़वे बोल 

Updated on 19 September, 2020, 6:00
किसी ने कहा है कि अंधेरे में माचिस तलाशता हुआ हाथ, अंधेरे में होते हुए भी अंधेरे में नहीं होता, इस तलाश को अपने भीतर निरंतर जीवित रखना कोई साधारण बात नहीं है, परंतु जो लोग सफर की हदों को पहचानते हैं, जिन्हें हर मंजिल के बाद किसी नए सफर... Read More

हथेली का कौन-सा तिल शुभ और अशुभ, जानिए कैसे तिल बना सकता है आपकी तकदीर

Updated on 18 September, 2020, 12:56
व्यक्ति के हाथ में कई रेखाएं होती हैं। हथेली की रेखाओं से व्यक्ति के भविष्य और स्वभाव का पता चलता है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, हथेली की रेखाओं के अलावा शरीर के अलग-अलग अंगों पर बने तिलों का भी विशेष महत्व होता है। तिल से भी व्यक्ति के भाग्य, तरक्की... Read More

प्रधानता आत्मा को 

Updated on 16 September, 2020, 6:00
मनुष्य सामान्यत: जो बाह्य में देखता, सुनता, समझता है वह यथार्थ ज्ञान नहीं होता। किन्तु भ्रमवश उसी को यथार्थ ज्ञान मान लेता है। अवास्तविक ज्ञान को ही ज्ञान समझकर और उसके अनुसार अपने कार्य करने केकारण मनुष्य अपने मूल उद्देश्य सुख-शान्ति की दिशा में अग्रसर न होकर विपरीत दिशा में... Read More

 कैंची काटती है, सुई जोड़ती है 

Updated on 15 September, 2020, 6:00
कैंची काटती (तोड़ती) है और सुई जोड़ती है। यही कारण है कि तोड़ने वाली कैंची पैर के नीचे पड़ी रहती है और जोड़ने वाली सुई सिर पर स्थान पाती है। इसलिए मनुष्य का यही धर्म है कि इनसान को जोड़े न कि तोड़े। उन्होंने सास-बहू में एका होने का आह्वान... Read More

 जहाँ शांति है वही सुख 

Updated on 14 September, 2020, 6:00
यदि हमारे पास दुनिया का पूरा वैभव और सुख-साधन उपलब्ध है परंतु शांति नहीं है तो हम भी आम आदमी की तरह ही हैं। संसार में मनुष्यों द्वारा जितने भी कार्य अथवा उद्यम किए जा रहे हैं सबका एक ही उद्देश्य है 'शांति'। सबसे पहले तो हमें ये जान लेना... Read More

 जीवन एक क्रिकेट मैच 

Updated on 13 September, 2020, 6:00
प्रांतिकारी संत तरुणसागरजी ने क्रिकेट की व्याख्या करते हुए कहा कि जीवन एक क्रिकेट है, धरती की विराट पिच पर समय बॉलिंग कर रहा है। शरीर बल्लेबाज है, परमात्मा के इस आयोजन पर अम्पायर धर्मराज हैं। बीमारियाँ फील्डिंग कर रही हैं, विकेटकीपर यमराज हैं, प्राण हमारा विकेट है, जीवन एक... Read More

क्या हैं आध्यात्मिक होने का अर्थ 

Updated on 12 September, 2020, 6:00
यह प्रश्न किसी भी जिज्ञासु के मन में उठ सकता है कि हमें ठीक-ठीक ऐसा क्या करना चाहिए ताकि वह जो परम है, जो परमेश्वर है, वह मेरे जीवन में घटित हो सके? सदगुरु इसका उत्तर देते हैं कि अध्यात्म भीगी बिल्लियों के लिए नहीं है, क्या तुम समझ रहे... Read More

ज्ञेय और ज्ञान का संबंध

Updated on 11 September, 2020, 6:15
दर्शन के क्षेत्र में ज्ञान और ज्ञेय की मीमांसा चिरकाल से होती रही है। आदर्शवादी और विज्ञानवादी दर्शन ज्ञेय की स्वतंत्र सत्ता स्वीकार नहीं करते। वे केवल ज्ञान की ही सत्ता को मान्य करते हैं। अनेकांत का मूल आधार यह है कि ज्ञान की भांति ज्ञेय की भी स्वतंत्र सत्ता... Read More

निर्णय में बदलाव पर नजर

Updated on 6 September, 2020, 6:00
लोगों के व्यवहार व कार्यो से या तो तुम सहमत होते हो या असहमत। परंतु इतना सदैव याद रखो कि सब कुछ परिवर्तनशील है। इसीलिए किसी भी निर्णय पर अड़े मत रहो वरना तुम्हारी धारणाएं चट्टान की तरह ठोस हो जाती हैं और तुम्हें व औरों को दु:खी करती हैं।... Read More

पशुवध निंदनीय-दंडनीय कर्म

Updated on 5 September, 2020, 6:45
सतोगुण में किये गये पुण्यकर्मो का फल शुद्ध होता है, अतएव वे मुनिगण, जो समस्त मोह से मुक्त हैं, सुखी रहते हैं। लेकिन रजोगुण में किये गये कर्म दुख का कारण बनते है। भौतिक सुख के लिए जो भी कार्य किया जाता है, उसका विफल होना निश्चित है। उदाहरणार्थ, यदि... Read More

वाणी का हमेशा रखें ध्यान 

Updated on 3 September, 2020, 6:45
हमारी वाणी भी जीवन में अहम भाव रखती है और यह बिगड़ जाये तो जीवन कष्टकारी होने में देर नहीं लगती, इसलिए अपनी वाणी हमेशा अच्छी होनी चाहिये। अगर ऐसा नहीं होता तो हमें विपरीन हालातों का सामना करना पड़ता है। कई बार ग्रह दशा से भी वाणी खराब हो... Read More

कर्त्तव्य को बनाएं सर्वोपरि लक्ष्य 

Updated on 30 August, 2020, 6:00
अध्यापक ने विद्यार्थियों से पूछा- ‘रामायण और महाभारत में क्या अंतर है?’ विद्यार्थियों ने अपनी-अपनी समझ के अनुसार उत्तर दिए। अध्यापक को संतोष नहीं हुआ। एक विद्यार्थी ने अनुरोध किया- ‘आप ही बताइए’ अध्यापक बोला-रामायण और महाभारत में सबसे बड़ा अंतर है ‘हक-हकूक’ का। रामायण में राम ने अपना अधिकार... Read More

बड़ी जीत का सपना पूरा करना है पूरा तो पहले छोटे लक्ष्य हासिल करें

Updated on 3 August, 2020, 6:30
बात उन दिनों की है, जब शिवाजी मुगलों के विरुद्ध छापामार युद्ध लड़ रहे थे। एक दिन वे छिपते-छिपाते एक वनवासी बुढ़िया की झोंपड़ी पर पहुंचे और उससे भोजन की प्रार्थना की। बुढ़िया ने प्रेमपूर्वक खिचड़ी बनाकर उन्हें परोस दी। शिवाजी को भूख बहुत जोरों से लगी थी, इसलिए जल्दी... Read More

 सुख के स्वभाव में डूबो

Updated on 27 July, 2020, 6:15
लगता है, आदमी दुख का खोजी है। दुख को छोड़ता नहीं, दुख को पकड़ता है। दुख को बचाता है। दुख को संवारता है; तिजोरी में संभालकर रखता है।   दुख का बीज हाथ पड़ जाए, हीरे की तरह संभालता है। लाख दुख पाए, पर फेंकने की तैयारी नहीं दिखाता। जो लोग... Read More

योगनिद्रा से दूर होंगे सभी तनाव  

Updated on 18 June, 2020, 6:15
आठ घंटे की नींद लेने के बाद जब उठते हैं तो आप खुद को थका हुआ और बोझिल महसूस करते हैं। जिसका सीधा सा मतलब है कि आप तनाव में हैं जो आप के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। नींद पूरी करने के बावजूद यदि थकान महसूस हो तथा... Read More

हर मनुष्य के जीवन हैं दुख

Updated on 9 June, 2020, 6:00
एक बार भगवान बुद्ध से किसी भिक्षु ने पूछा-भगवान! ईश्वर है या नहीं है? बुद्ध ने इसका सीधा उत्तर न देकर प्रश्नकर्ता भिक्षु से कहा-मनुष्य की समस्या ईश्वर के होने या न होने की नहीं है। मनुष्य की मुख्य समस्या है उसके जीवन में आने वाले दुखों की। भगवान बुद्ध... Read More

 मृत्यु के उपरांत शरीर नष्ट हो जाता है 

Updated on 8 June, 2020, 6:00
अष्टावप्र गीता' में आचार्य अष्टावक्र कहते हैं कि मनुष्य शरीर मात्र शरीर नहीं है। वह चैतन्य आत्मा है। आत्मा ही इस शरीर की पोषक है। जैसे ही आत्मा इस शरीर से बाहर निकलती है, शरीर विकृत होने लगता है। बुद्धि, कर्म, भोग, अहंकार, लोभ, मोह शरीर और मन के धर्म... Read More

धर्म का अर्थ

Updated on 31 May, 2020, 6:00
किसी संत के पास एक युवक आया और उसने उनसे धर्म ज्ञान देने की प्रार्थना की। संत ने कहा कि वह उनके साथ कुछ दिन रहे, फिर वे उसे धर्म का सार बताएंगे। युवक उनके आश्रम में रहने लगा। वह संत की हर बात मानता और उनकी सेवा करता। इस... Read More

सदाचार की परीक्षा

Updated on 30 May, 2020, 6:00
राजा अंग सिंह के पुत्र प्रवीण सिंह गलत संगति में पड़कर अनुचित कार्य करने लगा। चारों तरफ से उसकी शिकायतें आने लगीं। इससे राजा अत्यंत चिंतित हो गए। प्रवीण सिंह अभी बालक ही था, इसलिए राजा चाहते थे कि उसका स्वभाव बदले और भविष्य में वह एक नेक राजा बन... Read More

वैज्ञानिक बनने की चाह

Updated on 29 May, 2020, 6:00
किसी समय लंदन की एक बस्ती में एक अनाथ बालक रहता था। वह अखबार बेचकर किसी तरह अपना गुजारा करता था। कुछ समय बाद उसे एक जिल्दसाज की दुकान पर जिल्द चढ़ाने का काम मिल गया। उस बालक को पढ़ने का बहुत शौक था। वह पुस्तकों पर जिल्द चढ़ाते समय... Read More

प्रतिभा और ज्ञान 

Updated on 24 May, 2020, 6:00
एक संत को जंगल में एक नवजात शिशु मिला। वह उसे अपने घर जे आए। उन्होंने उसका नाम जीवक रखा। उन्होंने जीवक को अच्छी शिक्षा-दीक्षा प्रदान की। जब वह बड़ा हुआ तो उसने संत से पूछा, 'गुरुजी, मेरे माता-पिता कौन हैं?' संत को जीवक के मुंह से यह सुनकर बड़ा... Read More

 संकल्प और साहस  

Updated on 23 May, 2020, 6:00
खेल की कक्षा शुरू हुई तो एक दुबली-पतली अपंग लड़की किसी तरह अपनी जगह से उठी। वह खेलों के प्रति जिज्ञासा प्रकट करते हुए शिक्षक से ओलिंपिक रेकॉर्ड्स के बारे में सवाल पूछने लगी। इस पर सभी छात्र हंस पड़े। शिक्षक ने भी व्यंग्य किया- तुम खेलों के बारे में... Read More

चिंतन सही हो 

Updated on 19 May, 2020, 6:00
एक व्यक्ति ने अपने मित्र से साठ रूपए उधार लिए। कुछ दिनों बाद वह आया और बीस रूपए देकर बोला, 'सारे रूपए आ गए?' मित्र ने कहा, 'साठ दिए थे और तुम बीस लौटा रहे हो, तो अभी चालीस रूपए बाकी रहेंगे। तीस और तीस साठ होते हैं।' उसने कहा,... Read More

 धर्म का अर्थ

Updated on 18 May, 2020, 6:00
किसी संत के पास एक युवक आया और उसने उनसे धर्म ज्ञान देने की प्रार्थना की। संत ने कहा कि वह उनके साथ कुछ दिन रहे, फिर वे उसे धर्म का सार बताएंगे। युवक उनके आश्रम में रहने लगा। वह संत की हर बात मानता और उनकी सेवा करता। इस... Read More

आत्मज्ञान के लिए पात्रता

Updated on 17 May, 2020, 6:00
एक बार की बात है। एक धनिक सेठ एक पहुंचे हुए संत के पास पहुंचा और उनसे बोला, 'महाराज, मैं आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए साधना का प्रयास करता हूं। परंतु मेरा मन ध्यान में एकाग्र ही नहीं हो पाता। आप मुझे मेरे मन को एकाग्र करने का कोई मंत्र... Read More

हम असंतुष्ट रहेंगे तो जीवन में अशांति बनी रहेगी और हम कभी भी सुखी नहीं हो सकते

Updated on 16 May, 2020, 6:45
जो लोग अपने जीवन से असंतुष्ट रहते हैं, उनका मन कभी भी शांत नहीं हो सकता है। सुख-शांति पाना चाहते हैं तो जीवन में संतुष्टि होनी चाहिए। इस संबंध में एक लोक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार पुराने समय में एक किसान गरीबी की वजह से बहुत परेशान रहता... Read More

 दूसरे की गलती

Updated on 15 May, 2020, 6:00
एक बार गुरु श्यामानंद ने अपने चार शिष्यों को एक पाठ पढ़ाया। पढ़ाने के बाद वह अपने शिष्यों से बोले, 'अब तुम चारों इस पाठ का बार-बार अध्ययन कर इसे याद करो। इस बीच यह ध्यान रखना कि तुम में से कोई बोले नहीं। थोड़ी देर बाद मैं तुमसे इस... Read More

 संत का धन

Updated on 14 May, 2020, 6:00
उन दिनों विजय नगर में संत पुरंदर की ख्याति बढ़ती ही जा रही थी। हर प्रकार के मोह-माया से मुक्त त्यागमूर्ति पुरंदर अपनी पत्नी के साथ नगर से बाहर एक कुटिया में रहते थे और भिक्षा मांग कर गुजारा करते थे। उनके नाम की चर्चा उड़ते-उड़ते राजा कृष्णदेव राय तक... Read More

श्रम रहित परिश्रम

Updated on 13 May, 2020, 6:00
महर्षि वेदव्यास किसी नगर से गुजर रहे थे। उन्होंने एक कीड़े को तेजी से भागते हुए देखा। मन में सवाल उठा- एक छोटा सा कीड़ा इतनी तेजी से क्यों भागा जा रहा है? उन्होंने कीड़े से पूछा- ऐ क्षुद्र जंतु! तुम इतनी तेजी से कहां जा रहे हो? कीड़ा बोला-... Read More

दृष्टि में सब रखें

Updated on 12 May, 2020, 6:00
एक व्यक्ति ने कहा, 'सर्दी लग रही है। ठिठुर रहा हूं।' दूसरे ने कहा, 'जाओ, कपड़ा ओढ़ लो।' वह घर में गया और मलमल की चादर ओढ़ आया। आकर बोला, 'कपड़ा ओढ़ लिया, फिर भी ठंड लग रही है।' उसने कहा, 'भले आदमी! मैंने कपड़ा ओढ़ने के लिए कहा था।... Read More