ख़राब टायर वाले 108 वाहन में मरीजों की जिंदगी* *मरीज के उपयोग आने वाला एंबुलेंस खुद बीमार* *सरकार स्वास्थ्य विभाग को बेहतर बनाने के लिए करोड़ो रुपये खर्च कर रही है, लेकिन धरातल पर कुछ नहीँ* *108 एंबुलेंस वाहन में 60 प्रकार की दवाइयां तो दूर फस्ट-एड बॉक्स भी टूटे* *संवाददाता होकम प्रजापति मंडावर
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सरकार स्वास्थ्य विभाग को बेहतर बनाने के लिए करोड़ो रुपये खर्च कर रही है. यहा तक की सभी स्वास्थ्य केंद्रो में मरीजों की सुविधा के लिए एम्बुलेंस वाहन उपलब्ध करायी है. लेकिन एम्बुलेंस खुद बीमार है. ऐसा ही हाल राजगढ़ जिले में कई एम्बुलेंस में देखा जा सकता है,.एम्बुलेंस का स्टेपनी टायर भी नही है.ओर जो टायर लगे है उसमेंतार निकलते नजर आ रहे है, आपको बता दे की रोड पर पड़े घायलों और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाले 108 वाहन आज स्वयं बीमार पड़े हुए हैं। इनकी कंडीशन खराब होने के साथ ही प्राथमिक उपचार की एक भी दवा वाहन में मौजूद नहीं हैं,साथ ही 108 वाहन में इमरजेंसी में मरीजों के अस्पताल पहुँचाना होता है जिसमे शासन द्वारा लगभग 60 प्रकार की दवाईयों ओर इंजेक्शन उपलब्ध होना चाइये, लेकिन कुछ नहीँ मिलता, ओर तो ओर खास बात यह भी है की मरीजों के लिए ऑक्सीजन सुविधा हेतु सिलेंडर भी रखे गए थे, लेकिन खाली सिलेंडर शोपीस रखे रहते हैं और मरीज को एंबुलेंस में ठीक से हवा भी नहीं मिल पाती,ए सी की तो दूर की बात है लेकिन ठीक से हवा भी नहीं मिल पाती है ऐसे में खस्ता हाल 108 वाहन में मरीज तो बाद में मरेंगे लेकिन इससे पहले 108 चालक और ईएमटी ना मर जाए, या फिर कभी टायर फटने से अन्य वाहन चालक को न मार बैठे,कोई बड़ी घटना न घटे इससे पूर्व जिला प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाइये,
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