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            राजगढ। तहसील न्यायालय ब्यावरा में पदस्थ *चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश श्री अमजद अली ब्यावरा* द्वारा अपने न्यायालय के सत्र प्रकरण क्रमांक 272/2022 में फैसला सुनाते हुयेें आरोपीगण रामराज, आजाद, लाखन, घनश्याम, भरतराम, रामबाबू, हेमराज, जगमोहन  सर्व निवासी ग्राम बरखेडी थाना देहात ब्यावरा जिला राजगढ़ (म.प्र.) को हत्या एवं बलवा करने के आरोप में धारा 302, 147, 149 भादवि में दोषी करार। *अभियोजन की ओर से प्रकरण में पैरवी सहायक संचालक (अभियोजन) श्री आलोक श्रीवास्तव* के द्वारा की गई। 

घटना का संक्षेप में विवरण इस प्रकार है कि दिनांक 09.04.2022 के रात्री 9ः30 बजे अभियुक्त रामबाबू निवासी बरखेडी ने अपने मोबाईल से डायल 100 पर सूचना दिया कि मेरे खेत से सिचांई के पाईप एक व्यक्ति चोरी कर रहा था जिसे हम लोगों ने पकड लिया है। इस सूचना को डायल 100 पर इस प्रकार लेख किया गया ’’बरखेडी गांव में कुंए के पास मेन रोड पर चोर को पकड रखा है’’ । सूचना पर डायल 100 ग्राम बरखेडी पहंुंची और वहां से अभियुक्तगण द्वारा पकडे गये व्यक्ति मांगीलाल को थाना देहात ब्यावरा लेकर आ गई। जिसके उपरांत घनश्याम ने हमराह लाखन के साथ थाना आकर एक एनसीआर दर्ज करवाया कि मांगीलाल ने उनके खेत के पाईप तोड दिये है। मृतक मांगीलाल करीबन बारह बजे अचानक बेहोस हो गया जिसे तुरंत उपचार हेतु ब्यावरा के पंजाबी नर्सिंग होम अस्पताल और फिर रेफर उपरांत भोपाल के एलबीएस हास्पिटल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों के द्वारा मांगीलाल को मृत घोषित कर दिया। 

दूसरे दिन  सुबह 7ः30 बजे फरियादी लक्ष्मीनारायण ने देहाती मर्ग नालसी एवं प्रथम सूचना रिपोर्ट इस आशय कि लेख कराई कि कल रात दिनांक 9.4.22 को 9ः30 बजे गांव के सरपंच ने बताया कि मांगीलाल के साथ कुंए पर मारपीट हो रही है तो मैं कुंए पर गया तो मैने देखा कि मांगीलाल के साथ मेरे गांव के रामराज, आजाद, लाखन, घनश्याम, भरतराम, रामबाबू, हेमराज, जगमोहन, लट्ठ एवं हाथ मुक्कों से मारपीट कर रहे थे बाद में मौके पर अन्य लोग आ गये तब मृतक मांगीलाल ने बताया कि आरोपीगण ने पुरानी रंजिश को लेकर मारपीट की है जिससे मुझे सिर में पीठ पर कमर पर दोनों पुट्ठे पर एवं दोनो पैरों में चोटे आई है जिनके कारण मृतक की मृत्यु हुई है। 

*अभियुक्तगण द्वारा पुलिस को गुमराह कर अपने बचाव में झूठी रिपोर्ट लेख कराई:-*

  अभियुक्त गणों ने मृतक मांगीलाल के साथ मारपीट कर उसे बंधक बनाया और फिर डायल 100 पर सूचना देकर पुलिस बुलाई थाने पर जाकर डायल-100 के कॉलर आरोपी ने इवेंट में जानकारी दी थी कि ग्राम बरखेडी में एक चोर को पकड रखा है आप लोग आ जाओ फिर डायल 100 से पुलिस ने आकर मांगीलाल को झूठी सूचना पर थाना देहात ले गये। 

*मृतक के फौत होने के बाद भी राजनीति होती रही*

दूसरे दिन मृतक की मृत्यु होने पर नेशनल हाईवे क्रमांक 12 एबी रोड पर थाना देहात ब्यावरा के सामने धरने पर बैठ गये कि मृतक मांगीलाल की मृत्यु पुलिस अभिरक्षा में हुई है और तत्कालीन थाना प्रभारी देहात ब्यावरा आदित्य सोनी को हटाने की मांग की और पुलिस के खिलाफ ही 302 का प्रकरण पंजीबद्व किये जाने हेतु धरना दिया गया।  धरने के दौरान पुलिस अधीक्षक की ओर से निष्पक्ष जॉंच कराने के आश्वासन के बाद धरना समाप्त किया गया। तत्कालीन थाना प्रभारी देहात ब्यावरा श्री आदित्य सोनी के विरूद्ध जांच के आदेश जारी किये गये जो राजपत्रित पुलिस अधिकारी/एसडीओपी ब्यावरा द्वारा की गयी। जांच में यह पाया गया कि अभियुक्तगणों के मारने से ही सिर में आई मुंदी चोट के कारण मृतक मांगीलाल की मृत्यु हुई है। 

*विशेष अनुसंधानकर्ता अधिकारी नियुक्त*

चूकि मृतक मांगीलाल की हत्या के संबंध में आम लोगों द्वारा पुलिस की कार्यवाही को ही प्रश्नगत किया जा रहा था इस कारण राजगढ़ में महिला थाने में पदस्थ वरिष्ठ निरीक्षक श्री जंगबहादुर राय को विशेष अनुसंधानकर्ता अधिकारी बनाया जा कर देहात ब्यावरा थाना भेजा गया और उनके द्वारा विवेचना उपरांत चालान न्यायालय पेश किया गया।  

अभियुक्तगण द्वारा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत लेने हेतु पुलिस अभिरक्षा में मृत्यु होना बताया पर अभियुक्तगण का यह तर्क काम नही आया और इन्दौर और दिल्ली की अदालतों से जमानत भी नही मिली 

*सुप्रीम कोर्ट का विशेष आदेश -* अभियुक्तगणों 2 साल से जेल में बंद होने और जमानत आवेदन निरस्त कर जेल में ही रखे जाने के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को केस का फैसला 6 माह में सुनाने का आदेश जारी किया था। 

*विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति*-  इस अंधे हत्याकाण्ड में *तत्कालीन कलेक्टर श्री हर्ष दीक्षित ने जिला अभियोजन अधिकारी *आलोक श्रीवास्तव को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त कर* ब्यावरा न्यायालय में इस प्रकरण में अभियोजन संचालित किये जाने हेतु आदेश किया जिसके बाद प्रकरण में 29 गवाहों का परीक्षण किया गया। कुछेक गवाहों की गवाही दो-दो तीन-तीन दिन तक भी चली। 

स्वयं आरोपी हेमराज की गवाही भी कोई काम नही आई - अभियोजन की साक्ष्य उपरांत अभियुक्त हेमराज ने स्वयं न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर गवाही दी कि मृतक पुलिस वालों के मारने से आई चोटों के कारण मरा है हम लोगों ने उसे नही मारा है हम लोगों को पुरानी रंजीश पर से झूठा फसाया है। लोक अभियोजक की जिरह में यह गवाह जो स्वयं अभियुक्त भी था ढेर हो गया। 

न्यायालय के समक्ष अभियोजन की ओर प्रकरण के महत्वपूर्ण 29 गवाहों के न्यायालय में कथन कराये और तर्क किये इसके साथ ही अंतिम मौके तक सजा दिलाने के लिए लिखित अंतिम बहस पेश की। जिसके आधार पर सभी आरोपी दोषी करार दिये गये है।