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 प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा जिला जेल राजगढ़ एवं भंवर कॉलोनी स्थित शिव वरदान भवन में बसंत पंचमी का पर्व आध्यात्मिक रीति से मनाया गया। प्रातः आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में सुंदर सरस्वती की झांकी सजाई गई ।ब्रह्माकुमारी मधु दीदी ने सभी भाई बहनों को तिलक एवं अंग वस्त्र पहनाकर स्वागत किया वह ऋतुराज की तरह उमंग उत्साहित रहने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर  बड़ी संख्या में संस्था से जुड़े भाई बहनें उपस्थित रहे। अंत में सभी ने उत्साह पूर्वक रास किया।
 ‌ उसके पश्चात प्रातः 10:00 बजे से जिला जेल परिसर में कार्यक्रम किया जिसका शुभारंभ जेल अधीक्षक आलोक कुमार बाजपेई, प्रभारी जेल अधीक्षक अमर सिंह सोलंकी,  बीके सुरेखा दीदी, बीके दीपिका दीदी एवं शिक्षक लखन सिंह सोंधिया ने मां सरस्वती की पूजन एवं दीप प्रज्जवलन द्वारा किया।जिला जेल में ब्रह्माकुमारी सुरेखा दीदी ने बसंत पंचमी का आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए कहा कि मां सरस्वती से हमें प्रेरणा लेनी है उनको हंस वाहिनी भी कहते हैं। हंस क्षीर और निर को अलग कर देता है इसी प्रकार शुद्ध बुद्धि वाला मानव भी गुण रूपी मोती ही चुगता है और व्यर्थ एवं नकारात्मक बातों को छोड़ देता है। उन्हें श्वेत वस्त्रधारी दिखाना अर्थात अपने जीवन को निर्मल, पवित्र, शुद्ध रखना है। जब मन शुद्ध पवित्र होता है तो हमारे पास लक्ष्मी स्वतः आ जाती है।  
ब्रह्माकुमारी उमा दीदी ने सेवाकेंद्र पर बसंत उत्सव का महत्व बताते हुए कहा कि  इस समय प्रकृति भी अपने परिवर्तन की और आगे बढ़ती है इसके साथ-साथ हमें भी अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व है। पीला खाते भी हैं, पीला पहनते भी हैं, पीला रंग समृद्धि, सफलता और खुशहाली और आने वाले स्वर्णिम युग का प्रतीक है ज्ञान धन से संपन्न बन स्वर्णिम दुनिया  में जाने के लिए अपने आप को तैयार करना है। इस अवसर पर  जेल अधीक्षक आलोक कुमार बाजपेई ने सभी बंदी भाइयों को बसंत पंचमी की शुभकामना देते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था एक श्रेष्ठ मार्ग की ओर ले जाने का कार्य कर रही जो बहुत ही सराहनीय है 
अंत में सभी बंदी भाइयों को मां सरस्वती के सम्मुख नशा एवं बुराइयों से मुक्त रहने की प्रतिज्ञा कराई ।