सफलता की कहानी* *नल से जल गांव में खुशहाली, कुंडीबे की बदली तस्वीर* *सर्टिफाइट हर घर नल से जल गांव कुंडीबे की सफलता*
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*राजगढ़ 31 दिसम्बर, 2025*
राजगढ़ ज़िले का कुंडीबे गाँव उन गाँवों में शामिल हो गया है। जहाँ जल जीवन मिशन ने महिलाओं और बच्चों की रोज़मर्रा की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया है। वर्तमान में गाँव के सभी 147 घरों में फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन है। जिससे पीने और घरेलू उपयोग के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और साफ पानी मिल रहा है। साथ ही कुछ वर्ष पहले तक हालात बिल्कुल अलग थे। गांव की पेयजल व्यवस्था 4-5 हैंडपंप पर आधारित थी और गर्मी में वो भी सुख जाते थे। साथ ही 1.5 से 2 किलोमीटर दूर स्थित खुले कुओं से महिलाएँ सिर पर घड़े ढोकर पानी लाती थी। कई बार पानी परिवाहन कर टैंकर व्यवस्था की गई। आकांक्षी ज़िला होने के साथ-साथ राजगढ़ देश के गंभीर जल संकटग्रस्त जिलों में शामिल रहा है।
इस समस्या का स्थायी समाधान मध्य प्रदेश जल निगम मर्यादित द्वारा क्रियान्वित की गई। गोरखपुरा ग्रामीण जल आपूर्ति योजना से मिला। सतही जल स्रोतों पर आधारित यह योजना राजगढ़ (124) और खिलचीपुर विकासखंड (32) के 156 गाँवों को जल प्रदाय करती है और 1.15 लाख से अधिक आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करा रही है। कुंडीबे पंचायत भी इसी योजना का हिस्सा है। इसके तहत गांव में 1,00,000 लीटर क्षमता की पानी की टंकी, 3.312 किलो मीटर वितरण पाइप लाइन बिछाकर और 147 नल कनेक्शन के द्वारा गांव की आबादी (873) लोगों को पिछले एक साल से 24 घंटे जल प्रदाय किया जा रहा है।
गांव की आशा कार्यकर्ता श्रीमती कृष्णा पंवार के अनुसार, घर-घर नल से पानी मिलने से जलजनित बीमारियाँ घटी हैं। इसके कारण हर परिवार में सीजनल बीमारियों के कारण मेडिसिन और चिकित्सा पर होने वाला सालाना 5 हजार से ज्यादा का खर्च कम हो गया है। महिलाओं और किशोरियों को अब पानी के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती कुल्ता बाई ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों का स्वास्थ्य, शुद्ध पेयजल के कारण पहले से बेहतर हुआ है और किशोरियों की पढ़ाई व मासिक धर्म स्वच्छता में भी उल्लेखनीय सुधार आया है।
आज कुंडीबे एक सर्टिफाइड 'हर घर जल' गाँव है। सभी घरों, स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और पंचायत भवन में नल कनेक्शन उपलब्ध हैं। गाँव की वीडब्ल्यूएससी हर महीने शत प्रतिशत पानी टैक्स वसूल कर रही है और मध्य प्रदेश का पहला वीडब्ल्यूएससी बन गया है। जिसने एमपी पंचायत दर्पण पोर्टल पर पानी उपभोक्ताओं का पंजीकरण कर ई-रसीद व्यवस्था शुरू की है। कुंडीबे की कहानी यह साबित करती है कि जब तकनीक, सामुदायिक भागीदारी और जवाबदेही एक साथ आती हैं, तो पानी सिर्फ सुविधा नहीं रहता - वह सम्मान, स्वास्थ्य और अवसर में बदल जाता है।
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