*इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी नीलम बहन ने मकर संक्रांति का आध्यात्मिक अर्थ
बताया। यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है। जैसे सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर जाता है, वैसे ही आत्मा को भी देह-अभिमान से ऊपर उठकर आत्म-अभिमान की ओर जाना है। जब ज्ञान  सूर्य  परमात्मा शिव 
जो स्वयं प्रकाशमान हैं और सभी आत्माओं का पिता है जब वह इस धरती पर आते हैं तब  शांति, शक्ति और पवित्रता की किरणें देते हैं। तिल और गुड़ का भावार्थ है 
 आत्मा की मजबूती और सहनशीलता, गुड़ मीठे संस्कार और मधुर वाणी जीवन में कड़वाहट नहीं, मधुरता और प्रेम अपनाने का  प्रतीक है।दान का रहस्य
दान केवल वस्तुओं का नहीं, बल्कि
शांति, प्रेम,सहयोग का भी करना चाहिए। पतंग उड़ाना – ऊँचे संकल्पों का संकेत पतंग जितनी ऊँची उड़ती है, उतना संदेश मिलता है कि मन को भी ऊँचे, पवित्र और सकारात्मक संकल्पों में स्थिर रखना, शुद्ध संकल्प जीवन को पतंग सा हल्का बना देते है और आत्मा आनंद की ऊंचाइयों पर उड़ जाती है। इस अवसर पर बैंक रिटायर्ड मुरली मालाकार जी रामबाबू जी मालाकार एवं संस्था से जुड़े भाई बहनें उपस्थित रहे साथ में बचपन को याद करते हुए गिल्ली डंडे भी खेले, तिल गुड़ की लड्डू खिलाकर सभी का मुख मीठा कराया गया।