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 प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शिव वरदान भवन राजगढ़ में शिक्षक दिवस के अवसर पर विचार संगोष्ठी एवं शिक्षकों का सम्मान समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें शिक्षा के साथ संस्कारों के समावेश पर मुख्य रूप से विषय केंद्रित था।
परम शिक्षक परमात्मा का स्मरण तत्पश्चात पीएम श्री कॉलेज के प्रिंसिपल विपन खरे, शासकीय डाइट कॉलेज की प्रशिक्षिका शीला पाटोदिया, ब्रह्मा कुमारीज की जिला प्रभारी बीके मधु दीदी व पीजी कॉलेज के सेवानिवृत प्रोफेसर मनोहर लाल गुप्ता, शिक्षक कमलेश कुसुम व सेवा निवृत शिक्षक स्वयं प्रकाश शर्मा द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
  कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षकों, शिक्षाविदों और प्रबुद्धजनों ने भाग लिया। ।
 आधुनिक शिक्षा व संस्कारों के समावेश विषय  पर ब्रह्माकुमारी मधु दीदी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा की “ज्ञान से हम बुद्धिमान बनते हैं, लेकिन संस्कार हमें महान बनाते हैं, यदि विद्यार्थियों को केवल जानकारी दी जाए परन्तु मूल्य न दिए जाएँ, तो वे जीवन की चुनौतियों का सामना नहीं कर पाएँगे।शिक्षक के हाथ में पावर है कि वह विद्यार्थियों को काफी हद तक नई दिशा की ओर मोड़ सकते हैं लेकिन आज डिजिटल गैजेट्स के समय में शिक्षको के साथ माता-पिता की भी जिम्मेदारी है कि वह बच्चों के संस्कारों पर सजकता पूर्वक ध्यान दे। शिक्षक बच्चों को शिक्षा शब्दों के साथ-साथ आचरण से दे उन्हें सही गलत का ज्ञान देकर आत्मविश्वासी और समाज के लिए उपयोगी बनाये । उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वह बच्चों को न केवल सफलता की राह दिखाएं बल्कि उन्हें संवेदनशील अनुशासित और मूल्यनिष्ठ बनाने की दिशा में भी प्रयास करें” इसके लिए ब्रह्मा कुमारीज द्वारा सिखाए जा रहे राजयोग को सीख कर बच्चों को नैतिक शिक्षा में भी निपुण बनाएं।   
  इस अवसर पर पीएम श्री कॉलेज के प्रोफेसर विपिन खरे ने शुभकामनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन शिक्षकों के लिए नए विचार और नई दिशा लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है जब शिक्षक स्वयं प्रेरणास्रोत बनें। 
डाइट  शिक्षिका शीला पाटोदिया ने शुभकामनाएं देते हुए कहां की शिक्षक भविष्य के समाज को और देश को गढ़ते है इसलिए हम इस प्रेरणा से कार्य करे कि हम उन्हें अच्छा प्रोफेशनल बनाने के साथ साथ राष्ट्र के प्रति जिम्मेवार नागरिक भी बनाये | शिक्षा को आधुनिक तकनीक और मूल्यपरक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाना समय की मांग है।
    मनोहर लाल गुप्ता ने शुभकामनाये देते हुए कहा कि शिक्षक बच्चों के भविष्य की धुरी हैं। यदि शिक्षक ज्ञान के साथ चरित्र निर्माण पर ध्यान दें तो विद्यार्थी जीवन में किसी भी कठिनाई का सामना सहजता से कर सकते हैं।इस अवसर पर नगर के अनेक शिक्षक, शिक्षाविद् और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
 सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का अपर्णा पहना कर व प्रेरणादायक स्लोगन भेट कर सम्मान किया गया। मंच का कुशल संचालन सेवानिवृत्त शिक्षक सत्यनारायण शर्मा ने व आभार सेवानिवृत्त शिक्षक नाथू सिंह जाटव ने किया। ब्रह्माकुमारी कविता ने गाईडेंस मेडिटेशन करवाया, तो वही ब्रह्माकुमारी उमा ने संस्था की गतिविधियों से अवगत कराया एवं कुमारी वर्षा सोलंकी ने शिक्षक महिमा में सुन्दर नृत्य प्रस्तुत किया। अंत में सभी को प्रसाद वितरण कर कार्यक्रम का समापन हुआ।