बसंत पंचमी पर आत्मिक बसंत का संदेश*
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* प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शिव दर्शन भवन खिलचीपुर द्वारा बसंत पंचमी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी नीलम शुभकामनाएं देते हुए कहा बसंत के बहार आते ही मनुष्य मन के अंदर नई आशाये, नई आभा प्रवाहित होने लगती है जैसे कि नए जीवन हरेक को प्राप्त किया। कितनी सुंदर हम इस बाहरी मौसम को अनुभव करेंगे। पूरी धरनी जैसे सरसों के खेत से सुनहरी हो जाती है ये पीला रंग समृद्ध का प्रतीक। बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं, बल्कि आत्मा में नई चेतना, पवित्रता और दिव्य संस्कारों के जागरण का पर्व है।
ब्रह्माकुमारी अनीता बहन ने बताया गया कि जैसे बसंत ऋतु में प्रकृति हरी-भरी होकर नया जीवन पाती है, वैसे ही मनुष्य को भी अपने जीवन में नकारात्मक सोच और पुराने संस्कारों को छोड़कर ज्ञान, प्रेम और शांति को अपनाना चाहिए।
इस दिन पूजा जाने वाली माँ सरस्वती ज्ञान और शुद्ध बुद्धि का प्रतीक हैं, जो हमें अज्ञान के अंधकार से निकालकर सत्य और विवेक के मार्ग पर ले जाती हैं। पीला रंग ज्ञान, पवित्रता और प्रसन्नता का प्रतीक है, जो आत्मा को परमात्मा शिव के ज्ञान-प्रकाश से जोड़ने का संदेश देता है।
इस अवसर पर राजयोग ध्यान का अभ्यास कराया गया, जिससे उपस्थित जनों ने आंतरिक शांति और आत्मिक आनंद का अनुभव किया। मां सरस्वती की मनमोहक झांकी झांकी लगाई गई।कार्यक्रम के अंत में सभी ने संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में पवित्रता, सकारात्मकता और सेवा भावना को अपनाकर सच्चा आत्मिक बसंत मनाएँगे।
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