विकसित भारत का ब्लूप्रिंट और आर्थिक संप्रभुता का संकल्प: बजट 2026* _बजट 2026: तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का रोडमैप_ ✍️डॉ नयन प्रकाश गांधी पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट
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" केंद्रीय बजट 2026 दर्शाता है कि भारत अब उधार लेकर घी पीने की संस्कृति से बाहर निकल चुका है। हम भविष्य की संपत्तियों (Assets) के निर्माण के लिए निवेश कर रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां कर्ज के बोझ के बजाय विकसित बुनियादी ढांचे का आनंद ले सकें .बजट 2026 एक 'ग्रोथ-ओरिएंटेड' बजट है। यह सट्टेबाजी के बजाय 'वैल्यू इन्वेस्टिंग' को बढ़ावा देता है। मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर वे सेक्टर हैं जो आने वाले दशक में वेल्थ क्रिएटर साबित होंगे
"स्वदेशी डिजिटल इकोसिस्टम' (UPI, CoWIN) की सफलता ने सिद्ध किया है कि भारत अब दुनिया के पीछे नहीं चलता, बल्कि दुनिया का नेतृत्व करता है। यह बजट उस गौरवशाली भारत की गूँज है जो अपनी विरासत का सम्मान करता है और आधुनिकता के आसमान में सबसे ऊंची उड़ान भरने का दम रखता है। कल तक हम उनके लिए 'बाजार' थे, आज हम अपनी तकनीक और डेटा शक्ति के साथ उनके 'प्रतिद्वंद्वी' हैं। विकसित भारत का सूर्योदय हो चुका है"
केंद्रीय बजट 2026 केवल एक वित्तीय लेखा-जोखा नहीं, बल्कि 2047 के 'विकसित भारत' की आधारशिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बजट को 'ऐतिहासिक' और 'भविष्योन्मुखी' बताते हुए स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब केवल दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनकर संतुष्ट नहीं रहने वाला,अब लक्ष्य विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनने का है। यह बजट विश्वास-आधारित शासन और मानव-केंद्रित आर्थिक ढांचे की उस परिकल्पना को धरातल पर उतारता है, जहाँ सुधार, रफ्तार और समावेशिता एक साथ चलते हैं।
🤛MSME की शक्ति: स्थानीय से वैश्विक (Local to Global) बनने का समर्थन।
🤛युवा शक्ति: सेमीकंडक्टर 2.0 और बायोफार्मा मिशन से रोजगार सृजन।
🤛नारी शक्ति: 10 करोड़ महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को आधुनिक तंत्र से जोड़ना।
🏭MSME और आत्मनिर्भरता: स्थानीय से वैश्विक की उड़ान बजट का एक बड़ा हिस्सा 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' को नई ऊर्जा देने के लिए समर्पित है। प्रधानमंत्री के शब्दों में, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) भारत की वैश्विक भूमिका के नए सारथी हैं। बायोफार्मा शक्ति मिशन, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों को दिया गया समर्थन यह दर्शाता है कि भारत अब 'क्वालिटी सप्लायर' के रूप में अपनी धाक जमाने को तैयार है। रेयर अर्थ कॉरिडोर और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में निवेश न केवल उद्योगों को मजबूती देगा, बल्कि भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का एक विश्वसनीय लोकतांत्रिक साझेदार बनाएगा।
👨💻युवा शक्ति और नवाचार: नए भारत के निर्माता :वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौवीं बार पेश किए गए इस बजट को प्रधानमंत्री ने 'युवा शक्ति का बजट' करार दिया है। चिकित्सा केंद्रों की स्थापना से लेकर खेलो इंडिया और ऑडियो-विजुअल (ऑरेंज इकोनॉमी) तक, युवाओं के लिए अवसरों का एक नया क्षितिज खोला गया है। विशेष रूप से, भारत को 'डेटा सेंटर हब' बनाने के लिए दी गई कर छूट और गेमिंग-पर्यटन क्षेत्र में प्रोत्साहन यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत का युवा केवल रोजगार चाहने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजक (Innovator) बने। कौशल विकास और स्थिरता पर जोर युवाओं की क्षमताओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करने की एक सोची-समझी रणनीति है।
🤵♀️नारी शक्ति और ग्रामीण समृद्धि: विकास का मानवीय चेहरा :बजट का सबसे संवेदनशील और प्रभावी पहलू महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास है। 10 करोड़ से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) के आधुनिक तंत्र से जोड़ना और प्रत्येक जिले में छात्राओं के लिए छात्रावासों का निर्माण करना, सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह सुनिश्चित करता है कि समृद्धि केवल महानगरों तक सीमित न रहकर गाँव के प्रत्येक घर तक पहुँचे। इसके साथ ही, कृषि क्षेत्र में 'भारत विस्तार AI टूल' का समावेश तकनीक और परंपरा के उस मिलन को दर्शाता है, जहाँ किसान अपनी भाषा में जानकारी प्राप्त कर अपनी आय दोगुनी कर सकेंगे।
🛣️बुनियादी ढांचा: गतिशीलता ही प्रगति है माल ढुलाई गलियारे (Dedicated Freight Corridor), हाई-स्पीड रेल और जलमार्गों का विस्तार विकसित भारत की यात्रा को नई गति प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री ने नगर निगम बांडों को बढ़ावा देकर दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों को आर्थिक शक्ति केंद्रों में बदलने का जो खाका खींचा है, वह शहरीकरण की चुनौतियों को अवसरों में बदलने वाला है। राजकोषीय घाटे को कम रखते हुए उच्च पूंजीगत व्यय (Capex) का संतुलन बनाए रखना इस बजट की सबसे बड़ी आर्थिक विशेषता है।प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन राष्ट्र को याद दिलाता है कि 140 करोड़ नागरिकों का सामूहिक संकल्प ही भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाएगा। यह बजट महत्वाकांक्षी है क्योंकि देश की आकांक्षाएं बड़ी हैं। यह भविष्योन्मुखी है क्योंकि हम वर्तमान की चुनौतियों से डरने के बजाय भविष्य के अवसरों को भुनाने के लिए तैयार हैं। संक्षेप में, बजट 2026 'गांव, गरीब, किसान और नौजवान' के कल्याण के प्रति समर्पित एक ऐसा दस्तावेज है जो आत्मनिर्भरता के पथ पर भारत की 'उच्च उड़ान' को नई ऊंचाई देने वाला है।बजट 2026 की सबसे बड़ी विशेषता 'राजकोषीय विवेक' (Fiscal Prudence) और 'आक्रामक विकास' (Aggressive Growth) के बीच का सटीक संतुलन है। जहाँ एक ओर सरकार ने घाटे को कम करने का लक्ष्य रखा है, वहीं दूसरी ओर विकास की गति बढ़ाने के लिए तिजोरी का मुंह खोल दिया है।बजट 2026 की सबसे उत्कृष्ट विशेषता 'राजकोषीय विवेक' (Fiscal Prudence) और 'आक्रामक विकास' (Aggressive Growth) के बीच साधा गया वह अभूतपूर्व संतुलन है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा प्रदान करता है। सरकार ने एक ओर जहाँ वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता देते हुए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.2% पर सीमित करने का साहसिक लक्ष्य निर्धारित किया है, वहीं दूसरी ओर देश की विकास दर को नई गति देने के लिए पूंजीगत व्यय (Capex) की तिजोरी खोल दी है। इस वर्ष कैपेक्स को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ करना केवल एक आर्थिक आँकड़ा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रति एक दृढ़ संकल्प है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11% की प्रभावशाली वृद्धि को दर्शाता है। अर्थशास्त्र के 'मल्टीप्लायर इफेक्ट' के सिद्धांत के अनुसार, बुनियादी ढांचे पर खर्च किया गया प्रत्येक एक रुपया भविष्य में ढाई से तीन रुपये की आर्थिक सक्रियता पैदा करता है। यह विशाल निवेश सड़क, रेलवे, आधुनिक बंदरगाहों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के ऐसे जाल का निर्माण करेगा, जो भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के असीमित अवसर पैदा करेगा।विशेष रूप से उल्लेखनीय यह है कि इतने बड़े स्तर पर पूंजीगत निवेश के बावजूद राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखना सरकार की परिपक्व आर्थिक नीति का प्रमाण है। घाटे को कम रखने की यह रणनीति न केवल घरेलू स्तर पर मुद्रास्फीति यानी महंगाई को नियंत्रित रखने में सहायक होती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की आर्थिक साख (Credit Rating) को भी मजबूती प्रदान करती है। जब राजकोषीय घाटा कम होता है, तो वैश्विक रेटिंग एजेंसियां देश के आर्थिक स्वास्थ्य को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखती हैं, जिससे विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के लिए एक सुगम और सुरक्षित वातावरण निर्मित होता है। सरकार का दूरगामी लक्ष्य 2027 तक इस घाटे को 4% से नीचे लाना है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि भारत अपनी ऋण जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए भी निरंतर उच्च विकास दर प्राप्त करता रहे। संक्षेप में, यह बजट 'आज के निवेश' से 'कल की समृद्धि' लिखने का एक ऐसा संतुलित रोडमैप है, जहाँ वित्तीय स्थिरता और ढांचागत आधुनिकता एक साथ कदमताल कर रहे हैं, ताकि भारत अपनी आर्थिक संप्रभुता को बरकरार रखते हुए विश्व की तीसरी सबसे बड़ी शक्ति बनने की ओर अग्रसर हो सके।
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