राजगढ। जिला राजगढ में पदस्थ माननीय न्यायालय द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीष राजगढ में पदस्थ पीठासीन अधिकारी श्री सुरेष कुमार शर्मा द्वारा अपने न्यायालय के सत्र प्रकरण क्रमांक एसटी 231/22 में अहम फैसला सुनाते हुयें आरोपीगण कमल, दिनेष, ख्वाजू को हाथ-पैर काट कर हत्या एवं लूट करने के आरोप में धारा 302 भादवि के तहत समस्त 03 आरोपीगण को सश्रम आजीवन कारावास एवं धारा 397/34 भादवि में 07 वर्ष का कारावास एवं धारा 201 भादवि में 03 वर्ष का कारावास एवं आरोपी ख्वाजू को धारा 25 आर्म्स एक्ट में अतिरिक्त 2 वर्ष का करावास से दण्डित किया गया एवं समस्त को कुल 10,000/-रू का अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। अभियोजन की ओर से प्रकरण में पैरवी सहायक संचालक (अभियोजन) श्री आलोक श्रीवास्तव के द्वारा की गई। 

घटना का संक्षेप में विवरण इस प्रकार है कि दि. 25.02.2022 को सूचनाकर्ता द्वारा सूचना दी गई कि मल्हारपुरा से माचलपुर वाली रोड के पास खंती में एक महिला का शव पडा है, जो शैतानबाई उर्फ शांतिबाई पत्नि नारायणसिंह सौधिया निवासी पदमपुरा का शव है। मृतिका का दोनो पैर काट दिये है, एवं उसके गले पर भी धारदार हथियार से गला रेंतने की चोटें हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इसी के कारण उसकी मौत हो गई है।

           सूचनाकर्ता की उक्त सूचना पर थाना भोजपुर के द्वारा देहाती नाल्सी पंजीबद्ध कर जांच की गई। मौके से घटना स्थल से खून आलूदा मिट्टी, सादा मिट्टी, मृतिका की चप्पल, व घटना स्थल के पास पडा कपडा जप्त किया गया एवं मृतिका के शव का पी.एम. कराया गया, पीएम के दौरान डॉक्टर ने यह पाया कि मृतिका के हाथ में बाल फँसे हुए हैं, तब डॉक्टर द्वारा मृतिका की स्लाईड, कपडे एवं बाल संरक्षित कर थाना भोजपुर को भेजे। पुलिस के द्वारा अपराध क्र. 85/22 धारा 302,201 भा.द.वि. का पंजीबद्ध कर अनुसंधान में लिया गया। मृतिका की शिनाख्तगी मृतिका के पुत्र द्वारा की गई और यह बताया गया कि वह पैरों में चांदी के वज़नी कढ़े पहनती थी, जो उसके पैरों में नहीं है। 

प्रारंम्भिक जांच में मृतिका के पुत्र ने यह बताया कि वह शादी विवाह के कार्यक्रम में खाना बनाने के लिये ख्वाजू, दिनेष व कमल के साथ जाती थी। घटना के 1 दिन पहले भी उन्हीं के साथ खाना बनाने गई थी। तब तीनों अभियुक्तों को तलाश कर अभिरक्षा में लिया गया।

पुलिस द्वारा आरोपीगण से पिकअप गाडी के डेसबोर्ड से पैर में पहनने के चांदी का एक कड़ा, लोहे का धारदार छुरा एवं अन्रू सामग्रियों को जप्त किया गया। प्रकरण के अनुसंधान में आरोपियो के विरुद्ध अपराध धारा 302, 392, 201, 34 भा.द.वि.25 आर्म्स एक्ट सिद्ध पाये जाने से थाना भोजपुर का चालान माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

न्यायालय के समक्ष अभियोजन की ओर प्रकरण के 11 महत्वपूर्ण गवाहों के न्यायालय में कथन कराये और तर्क किये इसके साथ ही अंतिम मौके तक सजा दिलाने के लिए लिखित एवं मौखिक अंतिम बहस पेश की गई। जिसके आधार पर सभी आरोपी दोषी करार दिये गये है।

 

*हाथ पैर काटकर लूट में जिले की पहली सजा-*

जिला राजगढ में विगत 05-06 वर्षों से जिले में हाथ पैर काटकर जेवरातों की लूट करने की 8-10 घटनाएं हो चुकी है। यह पहला मामला है जिसमें सभी आरोपीगण को हाथ पैर काटने, लूट करने, एवं आयुध अधिनियम में सश्रम कारावास से दण्डित किया गया है।

 

*परिस्थितिजन्य साक्ष्य की श्रृंख्ला*

अभियोजन के द्वारा इस प्रकरण में घटना का कोई भी चक्षुदर्शी साक्षी नहीं था इस कारण परिस्थितिजन्य साक्ष्य की निम्नलिखित कडियों को जोडकर सफलता हासिल की है।

1. हत्या करने के आषय हेतुक एवं अवसर की उपलब्धता की परिस्थिति।

2. अंतिम बार देखे जाने की परिस्थिति। 

3. अभियुक्तण के कब्जे से मृतिका के चांदी के कडे जप्त होने की परिस्थिति

4. मृतिका के पुत्र द्वारा चांदी के कडे (आंवले) की पहचान करना 

5. अभियुक्तण से जप्त वस्तुओ की परिस्थिति। 

6. मृतिका के प्रदर्षों पर अभियुक्तगण के रक्त नमूना के समान डीएनए प्रोफाईल की परिस्थिति।

7. चैन ऑफ कस्टडी संबंधी परिस्थिति।

8. चिकित्सीय साक्ष्य की परिस्थिति।