प्रेम शांति पवित्रता सद्भावना सनातन धर्म के मूल गुण है:- ब्रह्माकुमारी सुरेखा दीदी*
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राजगढ़ के ग्राम तुमडियाखेड़ी में ग्राम वासियों एवं ब्रह्माकुमारीज राजगढ़ के संयुक्त सहयोग से सप्त दिवसीय श्रीमद भगवत गीता प्रवचन का आयोजन चल रहा है।भगवत प्रवचन के छठवें दिवस परमात्मा शिव की पूजन वंदन , दीप प्रज्वलन व परमात्म स्मृति से प्रारंभ किया । इस अवसर पर प्रवचनकर्ता ब्रह्माकुमारी सुरेखा दीदी ने बताया कि वर्तमान कलियुग के समय जब चारों ओर अधर्म दिखाई दे रहा है, ऐसे समय पर धर्म की स्थापना करने गीता में दिए वायदे अनुसार परमात्मा प्रजापिता ब्रह्मा के साकार तन में अवतरित होकर विश्व नवनिर्माण का कार्य कर रहे है। दीदी ने बताया कि शांति, प्रेम, पवित्रता, आनंद,सद्भावना आदि ही सनातन धर्म का मूल है। संस्कार परिवर्तन अर्थात श्रेष्ठ संस्कारों को धारण करने से ही संसार परिवर्तन होगा। इसके लिए हमें अपने जीवन को कमल पुष्प के समान बनाना होगा,इसके लिए सभी बुराइयों, पांचों विकार काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, द्वेष आदि तथा नकारात्मक विचारों से दूर रह एवं राजयोग ध्यान का नियमित जीवन में अभ्यास करें। इस अवसर पर राजगढ़ से समाजसेवी प्रतापसिंह सिसोदिया भी मौजूद रहे, जिन्होंने अंत में आयोजन के प्रति अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमें श्री राम, श्री कृष्ण जी के जैसे गुणों को जीवन में आत्मसात करना है।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामवासी एवं आसपास के श्रोताओं ने उपस्थित होकर श्रीमद् भगवत गीता प्रवचन का रसपान किया। अंत में परमात्म ध्यान एवं प्रसाद वितरण के द्वारा प्रवचन का समापन हुआ।
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