हराना । मंगलवार रात हुई झमाझम बारिश किसानों के लिए आफत बनकर आई। हराना,लीमा चौहान,भैसवामाता, चाटक्या,पाटक्या ,अरनिया माता,भ्याना आदि गांवों में खेतों में कटी पड़ी सोयाबीन की फसल पूरी तरह भीग गई। इससे जहां दानों पर दाग लगने और क्वालिटी खराब होने का खतरा है, वहीं मंडियों में फसल का भाव भी गिर सकता है। किसान अब दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। खेतों में पहले से ही पीले मोजक की मार झेल रही सोयाबीन की पैदावार कम हुई थी, अब ऊपर से बारिश ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी। जिन किसानों ने समय रहते फसल काटकर खेत में डाल दी थी, वे भी सुरक्षित नहीं रह पाए। बारिश से भीगने के कारण दाने काले पड़ सकते हैं और खराब क्वालिटी के चलते मंडियों में भाव में गिरावट होना तय माना जा रहा है। इससे किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलना मुश्किल हो जाएगा। किसान रामविलास पटेल, राजेश नागर ,मोहन नागर अशोक नागर,पवन नागर ने बताया कि मंगलवार रात की बारिश ने किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। खेतों में कटी पड़ी सोयाबीन पूरी तरह भीग गई। अब इसे सुखाने में समय और अतिरिक्त मेहनत लगेगी। मजदूरी भी बढ़ेगी और लागत में इजाफा होगा। उन्होंने कहा कि पहले ही सोयाबीन की पैदावार उम्मीद से काफी कम हुई है, ऊपर से बाजार में दाम भी अच्छे नहीं मिल रहे। ऐसे में बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसानों का कहना है कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो नुकसान और बढ़ेगा। फसल के पूरी तरह खराब होने का डर सताने लगा है। मंडियों में यदि बड़े पैमाने पर खराब क्वालिटी की सोयाबीन पहुंची तो भाव अपने आप नीचे आ जाएंगे। इसका सीधा असर छोटे किसानों पर पड़ेगा, जिनके पास फसल का भंडारण करने की सुविधा नहीं है और वे मजबूरी में किसी भी भाव पर फसल बेचने को मजबूर हो जाते हैं। कुल मिलाकर, झमाझम बारिश ने किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। बढ़ी हुई लागत, खराब क्वालिटी और मंडी में गिरते भाव के बीच किसान चिंता और असमंजस की स्थिति में हैं।