28 फरवरी 2026 जन्मदिन पर विशेष। *सकारात्मक सोच ही दिग्विजय होने का मूलमंत्र है।*
सकारात्मक राजनीति वह होती है जिसमें नेताओं और राजनेताओं का मुख्य लक्ष्य समाज की भलाई और विकास होता है न कि सिर्फ पद हासिल करना।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री माननीय श्री दिग्विजय सिंह जी का लंबा राजनीतिक सफर इसी विचारधारा पर केंद्रित रहा है।
आदर्श राजनीति में समाज की सेवा नेताओं का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए न कि सिर्फ अपने स्वार्थ की पूर्ति करना। दिग्विजय सिंह जी का आज तक का राजनीतिक सफर सिर्फ जनसेवा पर ही आधारित रहा है।
श्री दिग्विजय सिंह जी ने राजनीति में सदैव सामाजिक न्याय को बढ़ावा दिया है, जिससे कि सभी वर्गों के लोगों को समान अवसर और अधिकार मिल सके। मध्यप्रदेश में उनके मुख्यमंत्रित्व काल में पंचायती राज और ग्राम स्वराज को लागू कर सत्ता का विकेन्द्रीयकरण किया और पंचायतों को सशक्त कर आमजन के प्रति सामाजिक न्याय को बढ़ावा दिया।
नैतिकता और पारदर्शिता दिग्विजय सिंह जी के जीवन का मूल मंत्र है।कथनी और करनी में भिन्नता वर्तमान राजनीति की विशेषता हो चुकी है,वहीं श्री दिग्विजय सिंह जी देश के एकमात्र ऐसे राजनेता है जिन्होंने सदैव जो कहा सो किया। उनकी कथनी और करनी में एकरुपता उन्हें देश के अन्य राजनेताओं से पृथक करती है। उन्होंने अपने मुंह से जो भी कह दिया उस पर स्वयं अमल किया। इसका जीवंत उदाहरण वर्ष 2003 में उनकी पार्टी की सरकार नहीं बनने पर उन्होंने वचन दिया था कि वह आगामी 10 वर्षों तक कोई पद धारण नहीं करेंगे तो उन्होंने उनके कहे अनुसार कोई पद प्राप्त नहीं किया। दूसरा उदाहरण कि 3300 किलोमीटर की पैदल मां नर्मदा की परिक्रमा के दौरान संपूर्ण परिक्रमा मार्ग में राजनीति की कोई चर्चा नहीं होगी और उनकी यात्रा विशुद्ध धार्मिक यात्रा होगी वह बात भी उनकी अक्षरशः सत्य हुई। इससे यह साबित होता है कि वह अपने आचरण से विशुद्ध नैतिक व्यक्ति है। राजनीतिक कार्यक्रमों में सदैव श्री दिग्विजय सिंह जी मंच को छोड़कर अपने कार्यकर्ताओं के बीच में बैठे दिखाई देते है और पार्टी के छोटे बड़े कार्यकर्ता के साथ सदैव समान व्यवहार कर उन्हें बराबरी का सम्मान देते है जो उनकी राजनीति में विलक्षण प्रतिभा को दर्शाता है।
वे सहयोग और सहभागिता के मानदंड है। सबका साथ सबका विकास के नारे को भारत की राजनीति में श्री दिग्विजय सिंह जी ने पूरा किया। महात्मा गांधी जी के आदर्शों पर चलने वाले श्री दिग्विजय सिंह जी सदैव सर्वधर्म समभाव की ही बात करते रहे है।
उनके मतानुसार देश में किसी भी जाति या धर्म के आदर पर किसी भी नागरिक के साथ कोई दुर्व्यवहार या कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। सभी वर्गों के लोग प्रेम ओर भाईचारे से मिलजुल कर रहे यही श्री दिग्विजय सिंह जी का राजनीतिक लक्ष्य रहा है और उसे पूरा करने का उनके द्वारा सदैव प्रयास किया जाता रहा है।
उनकी स्वच्छ कार्यप्रणाली और राजनीतिक सिद्धांतों की प्रशंसा विरोधी दल के राजनेताओं के मुंह से सदन में कई बार सुनने को मिलती है। माननीय श्री दिग्विजय सिंह जी के पास कोई भी व्यक्ति यदि सहायता के लिए जाता है तो वह कभी भी खाली हाथ नहीं लौटता है चाहे वह व्यक्ति किसी भी वर्ग, जाति,राजनीतिक दल का हो बिना किसी भेदभाव के श्री दिग्विजय सिंह जी उसकी खुले हृदय से सहायता करते है। निस्वार्थ भाव से समाज के वंचित,बेसहारा वर्ग के अधिकारों की रक्षा में सदैव खड़े रहते है।
जनसेवा से बड़ा कोई पद नहीं हो सकता। जब कोई व्यक्ति समाज की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दूसरों के जीवन में खुशियां लाता है, तो वह वास्तव में महान बन जाता है। ऐसे ही महान राजनेता माननीय श्री दिग्विजय सिंह जी के जन्मदिन के अवसर पर ईश्वर से कामना करता हूँ कि वह उन्हें सदैव स्वस्थ, प्रसन्न रखते हुए उनके जीवन में वह सारी खुशियां प्रदान करे जो उन्होंने दूसरों को जीवन में दी है।
सादर
जे.पी.शर्मा
एडवोकेट (राजगढ़)
मध्यप्रदेश
9826172847
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