प्लास्टिक का उपयोग न कर, बिजली और जल को बचाकर पर्यावरण संरक्षण में दें योगदान- प्रोफेसर जैन* *महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय की भूगर्भ शास्त्र अध्ययन शाला में मनाया गया पृथ्वी दिवस*
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*छतरपुर।* महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो.राकेश कुशवाह के संरक्षण में तथा कुलसचिव यशवंत सिंह पटेल के निर्देशन में तथा विभागाध्यक्ष प्रो. पी के जैन के आतिथ्य में 22 अप्रैल 2026 को पृथ्वी दिवस मनाया गया। प्रो. पी के जैन के द्वारा छात्रों को बताया गया कि 22 अप्रैल 1970 को इसकी शुरुआत हुई थी। इसे पहली बार अमेरिकी सीनेटर गैलोर्ड नेल्सन द्वारा पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। वर्ष 1990 में इसे विश्व स्तर की पहचान मिली। यह प्रति वर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाता है। डॉ पी के जैन ने विस्तार से पृथ्वी दिवस के बारे में बताया कि इस विषय का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण की रक्षा एवं संरक्षण के लिए लोकतांत्रिक और सामाजिक रूप से सक्रिय करना। नवीकरणीय ऊर्जा, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके सौर और पवन ऊर्जा जैसे विकल्पों को तेजी से अपनाना चाहिए। उन्होंने शुद्ध जल की उपलब्धता, जल, वायु एवं मृदा प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय बतलाए। प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने, बिजली की बचत करने, जल का उपयोग बुद्धिमत्ता पूर्वक करके अगली पीढ़ी को जल उपलब्ध करा सकते हैं। जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग आदि को भी विस्तार से समझाया। विभाग की अतिथि विद्वान मुमताज जहां मंसूरी के द्वारा बताया गया कि इस वर्ष की आधिकारिक थीम "हमारी शक्ति, हमारा ग्रह" हैं। यह थीम मुख्य रूप से आम नागरिकों की शक्ति और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने पर केंद्रित है। 2026 के लिए मुख्य अभियान: द कैनोपी प्रोजेक्ट दुनिया भर में पेड़ों को लगाकर वनों का विस्तार करना। द ग्रेट ग्लोबल क्लीनअप नदियों, पार्कों और समुद्र तटों से कचरा और प्लास्टिक साफ करना ।सिविक मोबिलाइजेशन पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करना और उन्हें मतदान व अन्य नागरिक अधिकारों के प्रति प्रेरित करना है। अंत में अतिथि विद्वान आशिया बानो के द्वारा आभार व्यक्त किया गया। विभाग में अतिथि विद्वान गुट्टी लाल कुशवाहा तथा एम एस सी द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टरऔर बी एस सी द्वितीय सेमेस्टर के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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