सविनय निवेदन है कि हमारे जिले सहित पूरे प्रदेश में शिक्षा का स्वरूप दिन-प्रतिदिन व्यवसायिक होता जा रहा है। शिक्षा, जो समाज के विकास और राष्ट्र निर्माण का मूल आधार है, आज एक लाभ कमाने का साधन बनती जा रही है। निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा अत्यधिक शुल्क वसूली, अनावश्यक फीस संरचना, और शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट जैसे गंभीर मुद्दे सामने आ रहे हैं।
वर्तमान स्थिति में अभिभावक एवं विद्यार्थी आर्थिक रूप से शोषित हो रहे हैं। गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करना कठिन होता जा रहा है। यह स्थिति सामाजिक असमानता को भी बढ़ावा दे रही है।
अतः आपसे निवेदन है कि निम्नलिखित बिंदुओं पर आवश्यक कार्यवाही करने की कृपा करें—
1. नए सत्र के प्रारंभ होते ही निजी विद्यालयों के द्वारा प्राइवेट पब्लिकेशन के किताबों के साथ ही बहुत अधिक मूल्य की किताबों के लिए दबाव बनाया जा रहा है। 


2. निजी विद्यालयों द्वारा एक ही दुकान से किताबों को लेने का दबाव बनाया जा रहा है। 


3. निजी विद्यालय की ड्रेस भी एक ही दुकान पर मिलती है , जिससे उसकी कीमत अधिक ली जाती है। 

4. निजी विद्यालयों के द्वारा अपनी फीस में बढ़ोत्तरी की गई हैं, परंतु विद्यार्थियों को मिलने  वाली सुविधाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
 हमें पूर्ण विश्वास है कि आप इस गंभीर विषय पर 3 दिन में शीघ्र एवं सकारात्मक कार्यवाही करेंगे, जिससे शिक्षा का मूल उद्देश्य पुनः स्थापित हो सके। उक्त कार्यवाही समय पर पूर्ण नहीं होने पर विद्यार्थी परिषद् आंदोलन हेतु बाध्य रहेगी।
नगरमंत्री कुलदीप सिंगी, विद्यालय प्रमुख नीतिज्ञ उड़ाकर, अदनान ख़ान, नगर सह मंत्री आकाश मेवाड़े, सोनू, राजेश, बनती दंगी सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।