सुकमा। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के मुख्य धान संग्रहण केंद्र से सरकारी लापरवाही और अव्यवस्था का एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। संग्रहण केंद्र में खुले आसमान के नीचे रखा हजारों क्विंटल धान देखरेख के अभाव में पूरी तरह सड़कर बर्बाद हो चुका है, जिसके बाद प्रदेश की खाद्य, नागरिक आपूर्ति और विपणन व्यवस्था पर बड़े गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, खरीफ सीजन में गाढ़े पसीने की कमाई से उपजाकर किसानों द्वारा बेचे गए इस धान के समय पर उठाव (परिवहन) न होने के कारण यह पूरी तरह नष्ट हो गया। इस घोर लापरवाही से राज्य सरकार और सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की भारी वित्तीय क्षति होने की आशंका जताई जा रही है।

लापरवाही के आंकड़े: 36 हजार बोरियों में भरा धान पूरी तरह हुआ बर्बाद

संग्रहण केंद्र प्रबंधन द्वारा जिला मुख्यालय और खाद्य विभाग के वरिष्ठ आला अधिकारियों को भेजी गई आधिकारिक रिपोर्ट में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं:

  • केंद्र में सुरक्षित रखी गई 36 हजार से अधिक बोरियां पूरी तरह सड़ चुकी हैं।

  • इन बोरियों में बंद करीब 24 हजार क्विंटल धान अब किसी काम का नहीं रह गया है और पूरी तरह नष्ट हो चुका है।

  • महीनों तक खुले मैदान में पड़े रहने, कीड़े लगने और समय पर उचित रखरखाव (मेंटेनेंस) न मिलने के कारण धान की कूटने की क्षमता (गुणवत्ता) पूरी तरह खत्म हो गई।

15 महीनों का लंबा इंतजार: बारिश और नमी ने बिगाड़े हालात

विभागीय सूत्रों के अनुसार, धान की सरकारी खरीदी पूरी होने के बाद भी संग्रहण केंद्र से मिलों या सुरक्षित गोदामों तक अनाज को पहुंचाने के लिए लगभग 15 महीने तक कोई परिवहन नहीं किया गया। इस लंबे अंतराल के दौरान हजारों क्विंटल कीमती अनाज खुले आसमान के नीचे, बिना किसी पुख्ता सुरक्षा और तिरपाल के पड़ा रहा। पिछले सत्र की मानसूनी बारिश, हवा में मौजूद नमी, दीमक और चूहों के प्रकोप ने इस कड़वे सच को और बदतर बना दिया, जिससे देखते ही देखते करोड़ों का अनाज कचरे के ढेर में तब्दील हो गया।

रिकॉर्ड और हकीकत में बड़ा झोल: गायब मिला 11,000 क्विंटल धान!

इस पूरे मामले में केवल अनाज का सड़ना ही एकमात्र लापरवाही नहीं है, बल्कि एक बड़ा वित्तीय घोटाला और हेराफेरी भी सामने आ रही है। जब विभाग की टीम ने केंद्र का औचक निरीक्षण किया तो कागजों और जमीन की हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर मिला:

  • ऑनलाइन रिकॉर्ड: सरकारी पोर्टल और दस्तावेजों के मुताबिक केंद्र में 24 हजार क्विंटल धान सुरक्षित जमा होना दर्ज था।

  • भौतिक सत्यापन (Ground Verification): जब मौके पर बोरियों और वजन की वास्तविक जांच की गई, तो वहां केवल 13 हजार क्विंटल धान ही मौके पर मौजूद मिला।

  • 11,000 क्विंटल का अंतर: ऑन-रिकॉर्ड और ऑफ-रिकॉर्ड के बीच करीब 11 हजार क्विंटल धान का गायब होना (शॉर्टेज) प्रबंधन की मिलीभगत, फर्जी एंट्री या बड़े स्तर पर धान की चोरी की ओर साफ इशारा कर रहा है।

अधिकारियों का पल्ला झाड़ना जारी, अब तक किसी पर नहीं गिरी गाज

इस महाघोटाले और करोड़ों के नुकसान की बात सार्वजनिक होने के बाद सुकमा के स्थानीय ग्रामीणों और किसान संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत की कमाई को अफसरों ने सड़ने के लिए छोड़ दिया। मांग उठ रही है कि इस बर्बादी के लिए जिम्मेदार विपणन अधिकारियों और केंद्र प्रभारी की जवाबदेही तय कर उन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।

दूसरी तरफ, संग्रहण केंद्र के अधिकारियों ने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि उन्होंने धान खराब होने और धीमी परिवहन व्यवस्था को लेकर समय-समय पर जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित में पत्र भेजे थे, लेकिन ऊपर से कोई आदेश या बजट जारी नहीं किया गया। फिलहाल, रिकॉर्ड में इतने बड़े अंतर और अनाज की बर्बादी को लेकर उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित होने की उम्मीद है, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी पर कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।