रवीना टंडन की बेटी राशा थडानी और अजय देवगन के भांजे अमन देवगन की फिल्म 'आजाद' सिनेमाघरों में रिलीज
Movie Azad: रवीना टंडन की बेटी राशा थडानी और अजय देवगन के भांजे अमर देवगन की डेब्यू फिल्म 'Azaad' आज सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. ये फिल्म काफी समय से सु्र्खियों में बनी हुई थी और फैंस भी लंबे समय से इसकी रिलीज का वेट कर रहे थे, जो आज खत्म हो चुकी है. फिल्म को लेकर दर्शक भी सोशल मीडिया पर अपने रिव्यू शेयर कर रहे हैं और फिल्म की काफी तारीफ भी कर रहे हैं. फिल्म में राशा और अमन की शानदार केमिस्ट्री देखने को मिल रही है. दोनों की ये पहली फिल्म है, लेकिन उनकी एक्टिंग देखने के बाद ये अंदाजा लगाना मुश्किल है कि ये दोनों की पहली फिल्म है. दोनों के अभिनय ने फिल्म में बखूबी जान डाली. इस फिल्म की कहानी एक घोड़े के ईद-गिर्द घूमती है, जिसका नाम 'Azaad' है. फिल्म का कहानी आपको खुश करने के साथ-साथ इमोशनल भी करती है. फिल्म की कहानी 1920 के दौर में सेट की गई है, जब भारत अंग्रेजों की हुकूमत के अधीन था.
फिल्म की शानदार कहानी
इसमें बागी विक्रम सिंह (अजय देवगन) और उनके वफादार घोड़े आजाद की कहानी दिखाई गई है. गोविंद (अमन देवगन) नाम का एक गांव का लड़का, जिसे घोड़े बेहद पसंद हैं.आजाद पर मोहित हो जाता है. कहानी में जानकी देवी (राशा थडानी) की एंट्री होती है, जो गोविंद की मदद करती है. गोविंद और विक्रम के बीच के रिश्ते, उनके संघर्ष और गांव के भविष्य के लिए उनकी भूमिका फिल्म की मुख्य धुरी हैं. फिल्म में राशा के एक्सप्रेशन्स और डांस मूव्स ने दर्शकों का खूब दिल जाती.
राशा और अमन का शानदार अभिनय
उनका आइटम सॉन्ग भी खूब पसंद किया गया. वहीं अगर अमन की बात करें तो उनके किरदार के साथ न्याय काबिले तारीफ है. अजय देवगन की अदाकारी हर बार की तरह इस बार भी शानदार है. उनके इमोशनल और इंटेंस सीन दर्शकों को बांधकर रखते हैं. पीयूष मिश्रा, मोहित मलिक और बाकी सहायक कलाकारों ने भी अपने किरदारों को मजबूती से निभाया है. फिल्म तकनीकी रूप से भी बेहद मजबूत है, जो दर्शकों को आखिर तक बांधे रहती है और उनको इमोशनल करती है.
अच्छा है सिनेमैटोग्राफी और स्क्रीनप्ले
अभिषेक कपूर ने निर्देशन में सिनेमैटोग्राफी और स्क्रीनप्ले पर खास ध्यान दिया है. बैकग्राउंड स्कोर सीन्स को और गहराई देता है, जबकि फिल्म का म्यूजिक पहले ही हिट हो चुका है। एडिटिंग भी काफी क्रिस्प है, जिससे फिल्म कहीं भी खिंची हुई नहीं लगती. कुछ शॉट्स इतने सुंदर हैं कि दर्शक खुद को उस दौर में महसूस करते हैं. फिल्म की कहानी में रोमांच और इमोशन्स का अच्छा बैलेंस है. विक्रम और गोविंद के रिश्ते की गहराई और जानकी के साथ नोंक-झोंक कहानी को मजेदार बनाती है.
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