पारंपरिक अंदाज में मायरा,भाइयों का बहन के लिए खास प्यार और उत्साह दिखा।
मध्य प्रदेश के मंदसौर में दो भाई अपनी बहन के घर 11 बैलगाड़ियों से पहुंचे. वह मायरा भरने के लिए सभी मेहमानों को बैलगाड़ी से बहन की ससुराल लेकर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने बैलगाड़ियों को खूब सजवाया और 10 किलोमीटर का सफर 5 घंटे में नाचते-झूमते पूरा किया.
10 km दूर बहन के घर मायरा लेकर गए
मध्य प्रदेश के मंदसौर में दो भाई अपनी बहन के घर शादी में अनोखे अंदाज में मायरा (भात) देने गए. उन्होंने हेलीकॉप्टर या बड़ी-बड़ी गाड़ियों के बजाय 11 बैलगाड़ियों को बेहद खूबसूरती से सजवाया और उन्हीं से अपनी बहन के ससुराल पहुंचे. उनके बैलगाड़ी के काफिले को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग जा रही थी. बैलगाड़ियों को इतनी खूबसूरती से सजवाया गया था कि ये बेहद आकर्षित लग रही थीं.
मामला मंदसौर के गांव बाबरेचा से सामने आया है, जहां रहने वाले घनश्याम और ओमप्रकाश नागदा पुराने रीति रिवाजों को ध्यान में रखते हुए बैलगाड़ी पर बैठकर अपनी बहन के ससुराल गए. दोनों भाई अपनी बहन के घर पर अपनी भांजी की शादी में मायरा (भात) देने पहुंचे. उनकी भांजी पायल की शनिवार को शादी थी. अब पायल के मामाओं ने मायरा देने की ऐसी तैयारी की, जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई.
10 किलोमीटर का सफर
बाबरेचा के घनश्याम और ओमप्रकाश नागदा ने 11 बैलगाड़ियों को सजवाया. उसी में बैठकर बाबरेचा से मायरा भरने के लिए अपनी बहन के ससुराल गांव रिंडा पहुंचे. इन बैलगाड़ियों में दोनों भाई अपने रिश्तेदारों को बैठाकर शादी में गए. उनके गांव से बहन गिरिजा शर्मा का गांव 10 किलोमीटर की दूरी पर है. इस रास्ते को बैलगाड़ी सजाने वाले भाइयों के परिवार और रिश्तेदारों ने खूब एंजॉय किया.
मायरा भरने पहुंचे दो भाई
बैलगाड़ी के साथ इस सफर में बैंड बाजे, डीजे और ढोल-नगाड़े लेकर मामा अपनी भांजी की शादी का मायरा (भात) देने गए. मायरा एक पुरानी रस्म है. इसमें भाई अपनी बहन के बच्चों यानी अपनी भांजी-भांजे की शादी में कुछ पैसे, गहने और अपने-अपने हिसाब से सामान देते हैं. ये एक पुरानी परंपरा है, जो सालों से चलती आ रही है, जिसे पूरी करने के लिए ही दोनों मामाओं ने बैलगाड़ी से यात्रा की.
फूल, गुब्बारे से सजाईं बैलगाड़िया
भाई के गांव से बहन के गांव जाने वाली 10 किलोमीटर की दूरी का सफर बैलगाड़ी से 5 घंटे में तय किया गया. इस दौरान बैलगाड़ी को फूल के साथ-साथ गुब्बारों और गन्ने से पुराने जमाने की तरह ही सजाया गया था. बैलगाड़ी से जा रहीं महिलाओं ने इस सफर में मंगल गीत गाए. दोनों भाइयों ने बताया कि उन्होंने नई जनरेशन को पुरानी परंपराओं से जोड़ने के लिए इस तरह का आयोजन कि
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