(28 फरवरी 2025 को राजा साहब के "जन्मदिन पर विशेष')

....✍️ जे.पी.शर्मा की कलम से।

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जो सदैव एक जैसा दिखाई दे और अपने कार्य और व्यवहार में भी एक जैसा ही हो उसे ही तो सदाबहार कहते है। हर कोई कैसे सदाबहार हो सकता है.? सदाबहार शब्द एक ऐसा शब्द है जो हर किसी के मन को सुख-शांति प्रदान करता है। चाहे पेड़ सदाबहार हो या फिर व्यक्ति।

दूसरे अर्थ में यदि कहें तो जो सदैव एक सा रहे चाहे समय परिस्थितियाँ अनुकूल हो या प्रतिकूल। सदाबहार व्यक्ति या  वस्तु के मूल स्वभाव को प्रभावित नहीं कर सकती है।
हिंदुस्तान की राजनीति में ऐसे ही सदाबहार राजनेता है कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ राजनेता माननीय श्री दिग्विजयसिंह जी जिन्हें परिस्थितियाँ अनुकूल हो या प्रतिकूल कभी भी प्रभावित नहीं कर सकी। 

दस वर्षों तक मध्यप्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री रहने तथा जीवनभर कई महत्वपूर्ण राजनीतिक बड़े पदों पर रहने के बाद भी उन्हें अहंकार स्पर्श न कर सका। वे सदैव समभाव से जनसेवा में समर्पित रहे और जब पार्टी सत्ता में रही तब तो जनसेवा करना उनका परम दायित्व रहा और अपने दायित्व का निर्वहन भी उन्होंने बखूबी किया किंतु जब सत्ता में नही रहै उस स्थिति में भी वे जनता की अपेक्षा अनुरूप चौबीसों घण्टे जनसेवा में तत्पर रहे। यही विशेषता उन्हें और भी ज्यादा विलक्षण बनाती है।

कहते हैं उम्र बढ़ने के साथ कदमों की गति घटने लगती है किंतु यहाँ तो ठीक इसके विपरीत बढ़ती उम्र के अनुभवों की ऊर्जा नें दिग्विजयसिंह जी के कदमों को और भी अधिक गति प्रदान की है। भारत देश की राजनीति में एकमात्र  सदाबहार राजनेता माननीय श्री दिग्विजयसिंह जी जो देश की लगभग डेढ़ सौ करोड़ आबादी के लिए प्रेरणास्रोत है।

राजनीति में कुर्सी के लिए नैतिकता और सिद्धांतों को नीलाम करते राजनेताओं के कई उदाहरण देखे जा सकते हैं किंतु भारत देश की राजनीति में ऐसे विरलतम राजनेता ही हुए है जिन्होंने अपने दस वर्षों के राजनीतिक सन्यास के संकल्प को पूरा करने के लिए देश के केन्द्रीय मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद को अस्वीकार किया हो। 

सिद्धांत और धर्म एक दूसरे के पूरक है। हमेशा "जो कहा सो किया" जिनकी  कथनी और करनी में कभी भी कोई भेद नहीं रहा यही अद्वितीय गुण उन्हें सच्चा सनातनी बनाता है, क्योंकि कथनी और करनी में भेद इंसान के पाखंडी होने का प्रमाण है।

राजघराने में जनमे श्री दिग्विजयसिंह जी आज भी सार्वजनिक मंच से अपने को राजा कहने से यह कहकर इंकार करते है कि आजादी के बाद से ही राजा रजवाड़े अब नहीं रहे इसलिए वह अब आम नागरिक है। 

"सभी धर्मों का सम्मान करो और अपने धर्म को धारण करो" के सिद्धान्त पर चलने वाले श्री दिग्विजयसिंह जी के बारे में ऐसा कहा जाता है कि जब तक वे पूजा नहीं करते अन्न का एक कण भी ग्रहण नहीं करते। उनके द्वारा की गई माँ नर्मदा की 3300 किलोमीटर की पैदल परिक्रमा से यह सिद्ध है कि धर्म आत्म कल्याण के लिए उपयोगी है न कि राजनीतिक व्यापार के लिए।
अपने सिद्धांत, व्यवहार, और सेवाभाव में जीवनभर सदैव एकरूपता रखने वाले राजा साहब माननीय श्री दिग्विजयसिंह जी सदाबहार शब्द का पर्याय है। जो देश के हर वर्ग,जाति, धर्म,सम्प्रदाय  के लोगों के मन को सुख और शांति प्रदान करने वाले हैं।

जीवन के 79 वें बसंत में प्रवेश करने पर माननीय श्री दिग्विजय सिंह जी को उनके  जन्मदिन के अवसर पर ईश्वर से उन्हें उत्तम स्वास्थ्य,दीर्घायु प्रदान करने की कामना के साथ जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। 💐💐💐💐💐🙏

लेखक
जे.पी.शर्मा
एडवोकेट (राजगढ़) मध्यप्रदेश
98261-72847