उपराष्ट्रपति धनखड़ का 5 जून से हिमाचल और चंडीगढ़ दौरा, शिक्षा और प्रशासनिक संस्थानों के साथ संवाद करेंगे
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ गुरुवार 5 से 7 जून तक से चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश के 3 दिन के दौरे पर रहेंगे. उपराष्ट्रपति के ऑफिस की ओर से आज मंगलवार को उनकी आगामी यात्रा को लेकर जानकारी दी गई. धनखड़ रविवार को पत्नी सुदेश धनखड़ के साथ उत्तर प्रदेश के दौरे पर आगरा गए थे. चंडीगढ़ और हिमाचल दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति धनखड़ हिमाचल के सोलन में डॉ.वाईएस परमार बागवानी और वानिकी विश्वविद्यालय के छात्रों तथा शिक्षकों से संवाद भी करेंगे. इस विश्वविद्यालय की स्थापना 1 दिसंबर, 1985 को बागवानी, वानिकी और संबद्ध विषयों के क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के मकसद से की गई थी.
अहिल्याबाई की 300वें जयंती में शामिल हुए उपराष्ट्रपति
इससे पहले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ रविवार को उत्तर प्रदेश के आगरा के दौरे पर थे. वह यहां अहिल्याबाई होल्कर के 300वें जयंती वर्ष के स्मृति अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे. कार्यक्रम में अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती सिर्फ एक तारीख या ऐतिहासिक घटना नहीं है. यह हम सभी के लिए एक जीवन दर्शन की तरह है. उस कठिन दौर में भी अहिल्याबाई महान भारत की महान परंपरा की प्रतिनिधि थीं जहां धर्म, संस्कृति और शासन एक ही धारा में प्रवाहित होते थे.
CM योगी को बताया आधुनिक काल के अहिल्याबाई
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तुलना अहिल्याबाई होल्कर से करते हुए कहा कि अहिल्याबाई की सोच विधि की रचना की तरह सीएम आदित्यनाथ में आ गई है. आने वाली पीढ़ियां उनके कामों को ठीक उसी तरह याद करेंगी जैसे हम आज अहिल्याबाई के कामों की करते हैं. अहिल्याबाई और योगी आदित्यनाथ की तुलना करते हुए उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, “लोकमाता अहिल्याबाई ने कई मंदिर बनवाए.
सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, बद्रीनाथ, केदारनाथ, रामेश्वरम और न जाने कितने मंदिर उनके हाथ से संजीवित हुए. इस मौके पर मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संदर्भ में भी कहना चाहूंगा जो काम अहिल्याबाई होल्कर ने किया, उसी तरह का काम यूपी के आज के मुख्यमंत्री ने किया और प्रदेश की काया पलट दी. काशी विश्वनाथ, अयोध्या और सभी जगह काफी काम हुआ. आने वाली पीढ़ियां मुख्यमंत्री के इस काम को वैसे ही याद करेंगी जैसे हम आज अहिल्याबाई होल्कर को याद करते हैं.”
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