यूपी सरकार का बड़ा दांव: ललितपुर में फार्मा पार्क के जरिए प्रदेश को दवा विनिर्माण का केंद्र बनाने की तैयारी
उत्तर प्रदेश सरकार ने ललितपुर में फार्मा पार्क स्थापित करने की दिशा में पहल की है. उम्मीद है कि इससे गुजरात और आंध्र प्रदेश के साथ उत्तर प्रदेश भी भारत के प्रमुख थोक दवा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित होगा. ललितपुर जिला उत्तर प्रदेश के आख़िरी छोर पर मध्यप्रदेश से सटा है. उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के अनुसार, बुंदेलखंड क्षेत्र में इस परियोजना से 12,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है.
1,472 एकड़ में फैली यह परियोजना
यूपीसीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) मयूर माहेश्वरी ने कहा, ललितपुर में फार्मा पार्क परियोजना राज्य सरकार की ऐतिहासिक पहलों में से एक है। यह पूरी तरह से राज्य प्रायोजित है, जिसका उद्देश्य थोक दवा और एपीआई (सक्रिय फार्मास्युटिकल घटक) विनिर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करना है. उत्तर प्रदेश इसमें अग्रणी भूमिका निभाएगा.
उन्होंने बताया कि 1,472 एकड़ में फैली यह परियोजना अपने पहले चरण में प्रवेश कर चुकी है, जिसमें से 353 एकड़ पहले से ही इसके अधीन है. माहेश्वरी ने कहा, हमने पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त कर ली है और पहले चरण के लिए आवंटन शुरू हो गया है. परियोजना में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (तरल अपशिष्ट शून्य करने) पर भी जोर दिया गया है, जो एक उन्नत अपशिष्ट जल प्रबंधन रणनीति है. इसके तहत विनिर्माण के दौरान उत्पन्न सभी अपशिष्ट जल का उपचार किया जाता है, शुद्ध किया जाता है, और या तो सुविधा के भीतर पुन: उपयोग किया जाता है या सुरक्षित निपटान के लिए ठोस अपशिष्ट में परिवर्तित किया जाता है.
पिछले सप्ताह अहमदाबाद मेंरोड शो आयोजित किया गया, जहां कई कंपनियों ने प्रमुख निवेश प्रस्तावों पर हस्ताक्षर किए. यूपीसीडा अब प्रमुख फार्मा कंपनियों के व्यापक जुटान का लाभ उठाने के लिए मुंबई में इसी तरह की योजना बना रहा है. माहेश्वरी ने कहा, हमने हाल ही में गुजरात में और इससे पहले चंडीगढ़ और हैदराबाद में रोड शो आयोजित किए. हम प्रमुख फार्मा कंपनियों को आकर्षित करने के लिए मुंबई और अन्य स्थानों को लक्षित करने की योजना बना रहे हैं. सभी उपयोगिताएं भूमिगत होंगी.
माहेश्वरी ने ललितपुर फार्मा पार्क को प्लग-एंड-प्ले (उपयोग के लिए तैयार) ढांचा प्रदान करने वाली अत्याधुनिक सुविधा बताया. उन्होंने बताया कि यह स्थल सीसीटीवी निगरानी, आवास इकाइयों, इन-हाउस कौशल केंद्र और अन्य सहायक बुनियादी ढांचे से सुसज्जित है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह देश का सबसे अच्छा बल्क ड्रग पार्क बन जाए.
फर्मा सेक्टर में गूजेगा यूपी का नाम
फार्मा उद्योग की बदलती गतिशीलता पर माहेश्वरी ने कहा, हिमाचल प्रदेश वर्षों तक एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र था, लेकिन सब्सिडी और कर अवकाश समाप्त होने के बाद, विनिर्माता गुजरात और हैदराबाद चले गए. उत्तर प्रदेश उस कमी को पूरा करने के लिए अच्छी स्थिति में है. ललितपुर में हमारी इकाइयां दो से ढाई साल के भीतर चालू हो जाएंगी.उन्होंने कहा, आवंटन प्रक्रिया चल रही है, पर्यावरण संबंधी मंजूरी मिल चुकी है और दो साल के भीतर जमीनी स्तर पर भौतिक परिणाम दिखने लगेंगे.
माहेश्वरी ने पुष्टि की कि परियोजना के लिए पूरी भूमि पहले से ही यूपीसीडा के कब्जे में है और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), बिजली वितरण कंपनियों और आईआईटी एवं डीआरडीओ जैसे संस्थानों के साथ तकनीकी साझेदारी के सहयोग से बुनियादी ढांचे का उन्नयन जारी है. अधिकारियों के अनुसार, ललितपुर में लॉजिस्टिक पहुंच, औद्योगिक तत्परता, नीति समर्थन (पर्यावरणीय मंजूरी आदि) और भूमि सामर्थ्य का संयोजन है, जो इसे फार्मा विनिर्माण पार्क के लिए एक आकर्षक विकल्प बनाता है. यह रक्षा गलियारे के आगामी झांसी नोड के भी करीब है.
14,000 लोगों को मिलेगा रोजगार
बुंदेलखंड को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ ही उप्र को एक लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के सरकार के प्रयासों को भी बल मिलेगा. इस परियोजना से लगभग 14,000 लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान देगा और राज्य के व्यापक आर्थिक विकास लक्ष्यों का समर्थन करेगा.
एक अधिकारी ने बताया कि अहमदाबाद में निवेश पहुंच कार्यक्रम के दौरान, यूपीसीडा ने प्रमुख दवा और स्वास्थ्य सेवा कंपनियों के साथ कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए. सीएसएल लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड ने 200 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है. अधिकारी ने कहा कि इस परियोजना से 250 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने और दो साल के भीतर चालू होने की उम्मीद है.
उन्होंने कहा कि मेडीहीथ डायग्नोस्टिक प्राइवेट लिमिटेड ललितपुर में 4,200 वर्ग मीटर में एक हेल्थकेयर इकाई स्थापित करेगी, जबकि गमन इरेडिएशन एक स्किन ट्रीटमेंट और इरेडिएशन यूनिट के लिए 35 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बना रही है, जिससे 24-36 महीनों के भीतर लगभग 150 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है. इसके अलावा, ओबमेड फार्मा ने पांच एकड़ भूमि में एक फॉर्मूलेशन यूनिट स्थापित करने के लिए 200 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई है. उन्होंने कहा कि इस परियोजना के भी अगले दो वर्षों के भीतर शुरू होने की उम्मीद है.
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