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देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि श्री राधाकृष्णन का चयन ऐसे समय में हुआ है, जब देश को मजबूत, ईमानदार और दूरदृष्टि रखने वाले नेतृत्व की आवश्यकता है। उनकी निष्पक्षता, अनुभव और सामाजिक संवेदनशीलता उपराष्ट्रपति पद की गरिमा को और बढ़ाएगी तथा लोकतंत्र को नई दिशा देगी।
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*महत्वपूर्ण पड़ाव विस्तार से* 
👊शुरुआती जीवन: 1957 में जन्म, युवावस्था में आरएसएस से जुड़ाव तथा 1974 में जनसंघ राज्य कार्यकारी समिति के सदस्य बनना।
👊राजनीतिक भूमिका: 1996 में भाजपा राज्य सचिव, 1998-99 में दो बार लोकसभा सदस्य बने। 2004 में पहली बार भाजपा तमिलनाडु अध्यक्ष बने और सामाजिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर यत्राएं कीं।
👊प्रशासनिक नेतृत्व: 2016-2020 में कोयर बोर्ड के अध्यक्ष रहते हुए निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि। 2020-2022 में केरल भाजपा प्रभारी बने।
👊राज्यपाल पद: 2023 में झारखंड के राज्यपाल, तत्पश्चात तेलंगाना और पुडुचेरी का अतिरिक्त प्रभार। जुलाई 2024 में महाराष्ट्र के राज्यपाल नियुक्त हुए।
👊वर्तमान: अगस्त 2025 में उपराष्ट्रपति पद के लिए NDA के उम्मीदवार।

देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में उच्च संवैधानिक पदों पर अनुभवी, दूरदृष्टि और निष्पक्ष नेताओं का चयन हमेशा देश के भविष्य को दिशा देने वाला रहा है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) द्वारा महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद के लिए नामित करना न सिर्फ एक रणनीतिक फैसला है, बल्कि सुशासन, संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती की ओर भी एक स्पष्ट संदेश है।देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि श्री राधाकृष्णन का चयन ऐसे समय में हुआ है, जब देश को मजबूत, ईमानदार और दूरदृष्टि रखने वाले नेतृत्व की आवश्यकता है। उनकी निष्पक्षता, अनुभव और सामाजिक संवेदनशीलता उपराष्ट्रपति पद की गरिमा को और बढ़ाएगी तथा लोकतंत्र को नई दिशा देगी। अनुभवी राजनीतिज्ञ और जनसेवा में दीर्घ अनुभव के धनी राधाकृष्णन इस भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ नियुक्तियों में से एक माने जा रहे हैं।श्री राधाकृष्णन का सार्वजनिक जीवन चार दशकों से अधिक रहा है। उनका राजनीतिक और प्रशासनिक सफर तमिलनाडु स्थित छोटे कस्बों से शुरू होकर संसद और राज्यपाल जैसे बड़े पदों तक पहुंचा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक के तौर पर शुरू हुआ उनका जीवन भाजपा में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने तक पहुंचा। वे भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के तौर पर तमिलनाडु विधानसभा में, राज्यसभा में, दो बार लोकसभा सांसद के तौर पर तथा झारखंड के राज्यपाल के रूप में कार्य कर चुके हैं।राधाकृष्णन का पिछला कार्यकाल बताता है कि उनका जीवन राष्ट्र सेवा, राजनीति, प्रशासन और समाज सुधार के हर क्षेत्र में गतिशील और प्रेरणादायक रहा है।राज्यपाल के तौर पर उनके अनुभव ने उन्हें प्रशासनिक संयम और संवैधानिक नियमों की गहरी समझ दी। तमिलनाडु और झारखंड जैसे विविध राज्यों में उनकी सेवाएँ, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहलुओं की समझ को गहरा बनाती हैं। उनका जीवन हमेशा सार्वजनिक कल्याण, समाज के पिछड़े और वंचित तबकों का उत्थान, और पारदर्शी शासन की मिसाल रहा है। इसी के चलते एनडीए ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए चुना।तमिलनाडु से एक प्रमुख राजनेता का उपराष्ट्रपति पद के लिए चयन करना भाजपा की दक्षिण भारत में प्रभाव बढ़ाने की रणनीति का भी संकेत देता है। यह कदम न केवल राष्ट्रीय समावेशिता को मजबूती देगा, बल्कि संसद में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का संतुलन भी सुनिश्चित करेगा। राधाकृष्णन का सौम्य व्यवहार और विविध अनुभव संसद के दोनों सदनों में संवाद को मजबूत करेगा।सत्तारूढ़ गठबंधन ने अपने इस नामांकन द्वारा स्पष्ट किया है कि वे ऐसे अनुभवी और निष्पक्ष व्यक्ति को ऊँचे पदों पर लाने के पक्षधर हैं जो संसद के संचालन की गरिमा को बनाए रखें और संवैधानिक मूल्यों को आगे बढ़ाएं। प्रधानमंत्री ने भी श्री राधाकृष्णन के चयन का स्वागत करते हुए उनके अनुभव, प्रवृति और समर्पण की सराहना की।राधाकृष्णन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता उनकी पारदर्शिता, सौहार्द्र और प्रशासनिक दक्षता है। वे कई जटिल संवैधानिक मामलों को बिना किसी पक्षपात के समझने और सुलझाने में सक्षम हैं। उपराष्ट्रपति के रूप में उनकी जिम्मेदारी राज्यसभा के सभापति की भी होती है, जिसमें सदन की गरिमा बनाए रखना, गुणवत्तापूर्ण बहस को बढ़ावा देना, सदस्यों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करना तथा संसद की गतिविधियों को निष्पक्ष तरीके से संचालित करना शामिल है।पिछले वर्षों में देखा गया है कि संसद का ऊपरी सदन नीतिगत चर्चाओं, कानून निर्माण और राष्ट्रीय दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में श्री राधाकृष्णन का कार्यकाल इन महत्वपूर्ण पहलुओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को निरंतर नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है।श्री राधाकृष्णन के नेतृत्व में संसद में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता का स्तर बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। उनकी गहन प्रशासनिक समझ और समाज के विभिन्न वर्गों के प्रति संवेदनशीलता संसद की कार्यवाही को और अधिक जनोन्मुखी बनाएगी। वे अपनी दक्षता और प्रारूपिक दृष्टिकोण के चलते राज्यसभा के संचालन में नई राह दिखा सकते हैं।उनकी व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक यात्रा ने उन्हें न केवल कानून व्यवस्था और संवैधानिक दिशानिर्देशों में निपुण बनाया है, बल्कि वे समाज की विविध समस्याओं के प्रति भी अत्यंत संवेदनशील रहे हैं। चाहे गर्वनर के तौर पर राज्य में कानून व्यवस्था की चुनौती हो या संसद में जटिल विधायी विकल्प, वे हर स्थिति में संतुलित और सकारात्मक समाधान खोजने की कोशिश करते हैं।देश के विभिन्न हिस्सों की विशेषताएँ, समस्याएँ और प्रतिबद्धताएँ अलग-अलग होती हैं। ऐसे में दक्षिण भारत से उपराष्ट्रपति के तौर पर राधाकृष्णन का चयन भारत की अखंडता और सांस्कृतिक विविधता को सम्मान देने वाला कदम है। उनकी उपस्थिति देश के दूरस्थ तथा वंचित क्षेत्रों के लिए भी आशा की किरण है। समाज के पिछड़े, वंचित और ग्रामीण तबकों का सशक्तिकरण हमेशा उनकी प्राथमिकता में रहा है।सार्वजनिक नीति एवं प्रशासन के विशेषज्ञों ने भी श्री राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद के लिए उपयुक्त बताया है। वे देश की विभिन्न नीतिगत संस्थाओं के साथ जुड़े रहे हैं और सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक सुधारों में अहम भूमिका निभा चुके हैं। विशेषज्ञों का मत है कि उनका अनुभव संसद के दोनों सदनों के बीच बेहतर संवाद, दमदार बहस और पारदर्शी कानून निर्माण को प्रोत्साहित करेगा।देश के प्रख्यात युवा डेवलपमेंट ,पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट और प्रबंधन विश्लेषक एवं रिसर्च फाउंडेशन ऑफ इंडिया के सदस्य डॉ नयन प्रकाश गांधी का मानना है कि वर्तमान दौर में, राज्यसभा के समक्ष कई चुनौतियाँ हैं - जैसे विधायी प्रक्रियाओं में गुणवत्ता बनाए रखना, सार्वजनिक हित से जुड़े विषयों पर गंभीर चर्चा, क्षेत्रीय प्रतिनिधियों का समावेश, और देश के विकास में सदन की उल्लेखनीय भूमिका। ऐसे में सी.पी. राधाकृष्णन जैसे अनुभवी नेता की मौजूदगी निश्चित ही आश्वस्त करती है कि ये सभी पहलू सुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप आगे बढ़ेंगे।उपराष्ट्रपति के तौर पर श्री राधाकृष्णन से अपेक्षा है कि वे संसदीय लोकतंत्र की मर्यादाओं का पालन करें, उच्च सदन में गरिमा बनाए रखें, गुणवत्ता पूर्ण संवाद को बढ़ावा दें, और संवैधानिक संस्थाओं की सशक्त भूमिका की स्थापना करें। उनकी नेतृत्व शैली, निष्पक्षता तथा समाज के प्रति संवेदनशीलता संसद को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकती है।सी.पी. राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति पद के लिए चयन न केवल रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य की शासन व्यवस्था के लिए भी अत्यंत शुभ संकेत है। उनका सार्वजनिक जीवन और पारदर्शी अधिकारी की छवि संसद में उच्च आदर्शों की स्थापना करेगा। वे सदन के संचालन को निष्पक्ष बनाए रखते हुए, देश के विविध मुद्दों पर संवाद को प्रोत्साहन देंगे।भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में, सदन और संवैधानिक पदों पर ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता हमेशा रही है जो विचारशील, समावेशी, निष्पक्ष, और दूरदृष्टि हो। श्री राधाकृष्णन इस भूमिका में सर्वथा उपयुक्त हैं। उनसे उम्मीद है कि वे न केवल राज्यसभा की गरिमा बनाए रखेंगे, बल्कि सदन के सदस्यों का नेतृत्व करते हुए लोकहित एवं समाज के समावेश को प्राथमिकता देंगे। इस नए नामांकन से देश को सुशासन की ओर अग्रसर होने का प्रबल विश्वास मिला है।