बाल विवाह कराना या उसमें शामिल होना दंडनीय अपराध – “बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 (संशोधन 2007)” के तहत कठोर सज़ा का प्रावधान*
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*राजगढ़ 31 अक्टूबर, 2025*
कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा आमजन से अपील की गई है कि देव उठनी ग्यारस जैसे शुभ अवसर पर किसी भी प्रकार का बाल विवाह न किया जाए और न ही इसे बढ़ावा दिया जाए।
*अधिनियम के तहत दंड का प्रावधान*
यदि कोई 18 वर्ष से अधिक आयु का पुरुष किसी अल्पवयस्क लड़की से विवाह करता है, तो उसे 2 वर्ष तक का कारावास, एक लाख रूपये तक का जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है। बाल विवाह कराने वाले माता-पिता, रिश्तेदार, पंडित, बैंड बाजा वाले या अन्य सहयोगी व्यक्ति भी अपराधी माने जाएंगे। इन्हें भी 2 वर्ष तक की सजा या एक लाख रूपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
*क्या है बाल विवाह*
21 वर्ष से कम आयु के लड़के या 18 वर्ष से कम आयु की लड़की का विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है। ऐसा विवाह अवैध है, चाहे दोनों पक्षों की सहमति क्यों न हो।
*प्रशासन की चेतावनी*
किसी भी पंचायत क्षेत्र या गांव में यदि बाल विवाह की सूचना मिलती है तो तुरंत नीचे दिए गए नंबरों पर संपर्क करें, कंट्रोल रूम नंबर 07372-254360 (24×7 सक्रिय हेल्पलाइन),
नोडल प्रशासक वन स्टॉप सेंटर श्रीमती रश्मि चौहान संपर्क नंबर 7898357660 सूचना प्राप्त होते ही प्रशासन द्वारा तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाएगी। बाल विवाह की सूचना देने वाले व्यक्ति की जानकारी गोपनीय रखी जाएगी।
बाल विवाह रोकना या उसे हतोत्साहित करना हर जागरूक और जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है। बाल विवाह कराना या उसमें शामिल होना जेल की सजा और भारी जुर्माने का कारण बन सकता है।
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