जंगल और पहाड़ी इलाके में पनप रही अवैध अफीम खेती
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश की सीमा में स्थित कुसमी जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत खजूरी के आश्रित गांव तुरीपानी में भी अफीम की खेती का बड़ा मामला सामने आया है. इससे 2 दिन पहले कुसमी जनपद क्षेत्र के ही त्रिपुरी गांव में भी साढ़े तीन एकड़ से अधिक क्षेत्र में अफीम की खेती का खुलासा हुआ था और प्रशासनिक टीम इसकी कार्रवाई में जुटी हुई थी. इसी बीच खजूरी पंचायत में भी अफीम की खेती का पता चला और उसके बाद देर शाम प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची इसके बाद अधिकारियों ने पूरे इलाके को सील कर दिया और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया आज इस पूरे मामले में कार्रवाई की जाएगी हालांकि अभी तक पता नहीं चल सका है कि अफीम की खेती करने वाला माफिया कौन है. खजूरी पंचायत में अफीम की खेती के मामले में पुलिस के द्वारा दो लोगों को हिरासत में लिया गया है. उनसे खेती के संबंध में पूछताछ की जा रही है, बताया जा रहा है कि दोनों व्यक्ति जमीन मालिक हैं.
जंगलों, खेत-खलिहानों की जांच में जुटी टीम
बलरामपुर कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश के बाद बलरामपुर जिले के सभी क्षेत्र में अफीम की अवैध खेती की आशंका पर जांच कराई जा रही है.अधिकारियों को तीन दिन के ग्राउंड में जाकर जांच कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है. अधिकारियों की टीम जंगल, पहाड़, खेत खलिहान सभी जगह पहुंच रही है. अफीम की खेती मिलने पर कार्रवाई कर रहे हैं उन्होंने कहा है कि तीन दिन के भीतर अधिकारियों की रिपोर्ट आ जाएगी और उसके बाद मान लिया जाएगा की जांच पूरी हो गई है लेकिन अगर इसके बाद फिर अफीम की खेती के बारे में जानकारी मिलती है और अफीम की खेती पाई जाती है तो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. छत्तीसगढ़ की झारखंड से लगे हुए इलाके में बताया जा रहा है कि पिछले कई सालों से अफीम की खेती की जा रही थी लेकिन लोग इसे नहीं पहचान पाए थे. इस साल दुर्ग में अफीम की खेती के खिलाफ कार्रवाई हुई और उसका फोटो वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हुआ तब लोगों को पता चला कि उनके गांव में जो खेती हो रही है. वह भी अफीम की ही खेती है और इसके बाद इसकी जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंची और अब गांव पहुंचकर अफीम की खेती के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.
झारखंड में सैटेलाइट से निगरानी
अफीम की इस खेती में कई बड़े माफिया शामिल है. बताया जा रहा है कि सभी झारखंड के रहने वाले हैं. उनके द्वारा ऐसी जगह पर खेत किराए में लिया जाता था जहां आम आदमी की पहुंच बेहद कम हो या सड़क ना हो, मतलब जब भी प्रशासनिक अधिकारियों का गांव में दौरा हो तब वे उन खेतों तक न पहुंच सके. त्रिपुरी गांव में जहां अफीम की खेती की गई वहां भी करीब 1 किलोमीटर पैदल चलने के बाद ही पहुंचा जा सकता था, ठीक उसी तरीके से तुरीपानी नामक जगह में भी कई किलोमीटर पैदल चलने के बाद ही पहुंचा जा सकता है. पुलिस की टीम कल रात काफी मशक्कत के बाद तुरीपानी के उस खेत तक पहुंची, जहां पर अफीम की खेती की गई है. चारों तरफ से यह इलाका जंगल और पहाड़ से गिरा हुआ है. तुरीपानी इलाका खाई के नीचे बसा हुआ है.
इसलिए माफिया छत्तीसगढ़ को बना रहे ठिकाना
कुल मिलाकर अफीम की खेती करने वाले माफिया ऐसे सुरक्षित इलाके खोजने थे और फिर किसानों को कहा जाता था कि वह उनके खेत में गेंदा फूल की खेती करेंगे और जब लोग अफीम के फूल को देखते थे तब उन्हें कहा जाता था कि यह दूसरे प्रकार का गेंदा का फूल है हालांकि इस पूरे मामले में अभी तक प्रशासनिक अधिकारियों को अफीम की खेती करने वाले माफिया को पकड़ने में सफलता नहीं मिल सकी है सूत्रों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी अगर इसके पूरे रैकेट को खंगालते हैं तब अफीम माफिया तक पहुंचा जा सकता है. क्योंकि फिलहाल अभी तक पुलिस ने त्रिपुरी गांव में अफीम की खेती मामले में जिन 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है वे मजदूर और जमीन उपलब्ध कराने में सहयोग करने वाले लोग हैं. झारखंड के तस्कर छत्तीसगढ़ के इस इलाके में अफीम की खेती इसलिए कर रहे हैं क्योंकि झारखंड में लगातार सरकार के द्वारा पिछले कुछ सालों से बड़ी कार्रवाइयों की जा रही है. हजारों एकड़ में लगे अवैध अफीम की खेती को नष्ट किया जा चुका है. सेटेलाइट के माध्यम से जंगलों में किए जाने वाले अफीम की खेती पर भी निगरानी रखी जा रही है यही वजह है कि झारखंड में अवैध तरीके से की जाने वाली अफीम की खेती में 40% तक रोक लगाया जा सका है. माना जा रहा है कि इसके कारण अफीम के माफिया झारखंड और छत्तीसगढ़ के बॉर्डर के इलाके में खेती कर रहे हैं और भोले भाले आदिवासियों की जमीन को इसके लिए उपयोग में ला रहे हैं.
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