होर्मुज तनाव और युद्ध की फिक्र में, भारत को रूस से मिला सहारा
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान की अमेरिका और इजरायल के खिलाफ बढ़ती सैन्य सक्रियता और होर्मुज स्ट्रेट पर संभावित नाकेबंदी से उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए रूस से एक अत्यंत सुखद खबर आई है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के बीच हुई उच्च स्तरीय मुलाकात में रूस ने भारत को आश्वस्त किया है कि वह कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका से खाड़ी देशों से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। इस संकटपूर्ण घड़ी में रूस ने एक वैकल्पिक और सबसे भरोसेमंद साझेदार के रूप में अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और सामरिक हितों को बड़ी मजबूती मिली है।
रूस के उप-प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री से मुलाकात के दौरान स्पष्ट किया कि रूसी कंपनियां भारत को तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने में सक्षम हैं। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो ईरान युद्ध के तनाव के बीच मार्च महीने में ही रूस से भारत को होने वाली तेल सप्लाई में 90 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऊर्जा के साथ-साथ रूस ने भारत के कृषि क्षेत्र की सुरक्षा का भी संकल्प लिया है। डेनिस मंतुरोव ने जानकारी दी कि रूस ने वर्ष 2025 के अंत तक भारत को खनिज उर्वरकों की आपूर्ति में 40 प्रतिशत का इजाफा किया है और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए यूरिया उत्पादन की संयुक्त परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक को व्यापार, कनेक्टिविटी और उर्वरक जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने वाला बताया है। वहीं विदेश मंत्री जयशंकर ने ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, नवाचार और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग पर विस्तार से चर्चा की। हाल के दिनों में वैश्विक प्रतिबंधों के बावजूद रूस फिर से भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग नई ऊंचाइयों को छू रहा है। तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र का काम तय समय पर आगे बढ़ रहा है, वहीं रक्षा मोर्चे पर भारत ने रूस से पांच और एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने का निर्णय लिया है। रूस का यह अटूट सहयोग न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाएगा।
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