तकनीक का कमाल, वैज्ञानिकों ने कृत्रिम सूर्यग्रहण बनाया
लंदन। प्रकृति को समझने के लिए इंसान नैसर्गिक खगोलीय घटनाओं तक को कृत्रिम रूप दे रहा है। इसी कड़ी में पेरिस एयर शो में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कृत्रिम सूर्य ग्रहण की तस्वीरें जारी की हैं। सूर्य ग्रहण के इस अनूठे प्रयोग के लिए दो सैटेलाइटों को सटीक ढंग से सूर्य के सामने लाया गया।इन सैटेलाइटों को 2024 में छोड़ा गया था और मार्च 2025 से इन्हें कई बार सूर्य के सामने लाने का प्रयास हो रहा है। ये पृथ्वी से कई हजार किलोमीटर ऊपर एक-दूसरे से 492 फीट दूर उड़ रहे हैं।
कृत्रिम सूर्य बनाते समय इसमें से एक चांद की तरह सूर्य को ब्लॉक कर देता है और दूसरा अपने टेलिस्कोप से सूर्य के बाहरी वायुमंडल कोरोना का अध्ययन करता है। इस वर्ष जुलाई से इस पर वैज्ञानिक प्रयोग शुरू होगा। 21 करोड़ डॉलर के इस मिशन का नाम प्रोबा-तीन रखा गया है और अभी तक 10 सफल सूर्य ग्रहण बना लिए हैं।आंद्रे जुकोव ने बताया कि प्रयोग के प्राथमिक नतीजे बेहतर हैं। यह अनूठा और अविश्वसनीय था। उनका अनुमान है कि पूरे मिशन में करीब 200 ग्रहण बनाए जाएंगे, यानी हर हफ्ते औसतन दो ग्रहण।
इससे वैज्ञानिकों को अध्ययन के लिए 1000 घंटे से भी ज्यादा पूर्ण सूर्य ग्रहण की स्थितियां मिलेंगी। इससे ग्रहण के अध्ययन का ज्यादा समय मिलेगा, क्योंकि सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ ही मिनट के लिए पूर्ण ग्रहण होता है, जब चांद सटीक स्थिति में धरती और सूर्य के बीच आ जाता है।
राशिफल 5 अप्रैल 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
Kerala की राजनीति में उथल-पुथल, सुधाकरण का बड़ा बयान
2026 पर Mamata Banerjee का फोकस, मोदी सरकार को लेकर बड़ा बयान
Katni में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 15 बाइक समेत बदमाश पकड़े
संदीप दीक्षित का दावा—BJP में जा सकते हैं राघव चड्ढा
मेंटेनेंस कार्य के चलते जालंधर में कल बिजली आपूर्ति ठप रहेगी