ऑनर किलिंग केस में कोर्ट का फैसला, माता-पिता समेत भाई दोषी ठहरे
रोम: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने देश में महिलाओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर एक बेहद सख्त संदेश जारी किया है। पीएम मेलोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इटली में ऐसे लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है जो किसी भी सांस्कृतिक या धार्मिक परंपरा की आड़ में एक महिला की स्वतंत्रता, उसके आत्मसम्मान और उसके वजूद को ठेस पहुँचाने या नकारने का प्रयास करते हैं। मेलोनी का यह तीखा बयान पाकिस्तानी मूल की एक युवती की ऑनर किलिंग (सम्मान के नाम पर हत्या) के मामले में इटली की सर्वोच्च अपीलीय अदालत द्वारा सुनाए गए अंतिम फैसले का स्वागत करते हुए आया है।
समन अब्बास हत्याकांड पर अंतिम फैसला, पीएम ने जताई संवेदना
प्रधानमंत्री मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि समन अब्बास की नृशंस हत्या के मामले में अदालत के अंतिम फैसले के साथ ही एक बेहद दर्दनाक कानूनी लड़ाई का अंत हो गया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी मूल की समन को उसके ही माता-पिता और कुछ रिश्तेदारों ने सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतार दिया क्योंकि उसने अपनी मर्जी के खिलाफ जबरन की जा रही शादी का विरोध किया था और अपने भविष्य के फैसले खुद लेने के अधिकार की मांग की थी। मेलोनी ने कहा कि हालांकि कोई भी कानूनी फैसला उस मासूम की जिंदगी वापस नहीं ला सकता, लेकिन यह संतोषजनक है कि इस जघन्य अपराध के दोषियों को उनके किए की पूरी सजा मिली है। उन्होंने समन के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से उसकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
महिला अधिकारों पर कोई समझौता नहीं, पीछे नहीं हटेगा इटली
कड़ा रुख अख्तियार करते हुए पीएम मेलोनी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि महिलाओं की आजादी, सम्मान और जिंदगी से जुड़े सिद्धांत ऐसे मूल्य हैं जिनसे किसी भी परिस्थिति में कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने साफ किया कि इटली इन अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा अडिग रहेगा। बता दें कि यह पूरा मामला साल 2021 का है, जब समन अब्बास अपने ही परिवार की रूढ़िवादी सोच और ऑनर किलिंग का शिकार हो गई थी। उसके परिवार ने पाकिस्तान में उसकी इच्छा के विरुद्ध शादी तय की थी, जिसका उसने पुरजोर विरोध किया था।
शेल्टर होम से माता-पिता के पास लौटी और फिर हो गई लापता
घटना के समय समन नाबालिग थी। जब उसने शादी करने से इनकार कर दिया, तो अपने परिवार के खौफ से बचने के लिए उसने इटली के समाज कल्याण विभाग से सुरक्षा की गुहार लगाई। नवंबर 2020 में प्रशासन ने उसे एक सुरक्षित शेल्टर होम भेज दिया था, जहाँ से उसने अपने माता-पिता के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। हालांकि, 11 अप्रैल 2021 को वह दोबारा अपने परिवार के पास लौट आई, जिसके बाद अप्रैल के मध्य से ही वह अचानक लापता हो गई। तफ्तीश के दौरान पुलिस को घर के पास के सीसीटीवी फुटेज मिले, जिसमें परिवार के पांच लोग फावड़े, लोहे की रॉड और बाल्टी लेकर बाहर जाते और करीब ढाई घंटे बाद वापस लौटते दिखाई दिए थे।
डेंटल रिकॉर्ड से हुई शव की पहचान, सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी उम्रकैद
समन के लापता होने के एक साल से भी अधिक समय बाद, नवंबर 2022 में इटली के नोवेल्लारा शहर में उसके घर के नजदीकी इलाके से इंसानी शरीर के कुछ अवशेष बरामद हुए। फॉरेंसिक टीम ने डेंटल रिकॉर्ड्स (दांतों के नमूनों) के मिलान के आधार पर पुष्टि की कि यह शव समन अब्बास का ही था। इसके बाद कानूनी कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ी और अब इटली की सर्वोच्च अपीलीय अदालत 'सुप्रीम कोर्ट ऑफ कैसेशन' ने इस पूरे मामले में समन के माता-पिता और उसके चचेरे भाइयों को हत्या का मुख्य दोषी करार देते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा है।
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