वेनेजुएला में भूकंप ने मचाई तबाही, 16 हजार से अधिक घायल
काराकास। वेनेजुएला में आए विनाशकारी दोहरे भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है, जिससे चारों तरफ चीख-पुकार और मलबे का मंजर दिखाई दे रहा है। वेनेजुएला सरकार द्वारा सोमवार को जारी किए गए नए और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस भयावह प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 3,535 तक पहुंच गई है। वहीं, घायलों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ते हुए 16,740 हो चुका है। मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश और राहत कार्य अब भी युद्ध स्तर पर जारी हैं, जिससे हताहतों की संख्या में और इजाफा होने की आशंका बनी हुई है।
महज 39 सेकंड के अंतराल पर आए दो शक्तिशाली झटके
भूवैज्ञानिकों और खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, बीते 24 जून को उत्तर-मध्य वेनेजुएला के याराकुए राज्य को केंद्र बनाकर बैक-टू-बैक दो बेहद शक्तिशाली भूकंप आए। पहला झटका रिक्टर पैमाने पर 7.2 की तीव्रता का था, जिसे 'फोरशॉक' माना गया। इसके ठीक 39 सेकंड बाद 7.5 तीव्रता का मुख्य और अधिक विनाशकारी भूकंप का झटका महसूस किया गया। महज डेढ़ से दो मिनट के भीतर धरती के इस भयंकर कंपन ने पूरी व्यवस्था को हिलाकर रख दिया।
राजधानी के उत्तर में स्थित ला गुएरा में मलबे का ढेर
इस त्रासदी का सबसे भीषण रूप राजधानी काराकास और उसके उत्तर में स्थित तटीय राज्य ला गुएरा में देखने को मिल रहा है। भूकंप के झटके इतने तीव्र थे कि देखते ही देखते बहुमंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं और पूरे के पूरे रिहायशी मोहल्ले मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। हजारों परिवार इस समय बेघर हो चुके हैं और खुले आसमान के नीचे या अस्थाई राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। प्रभावित इलाकों में बिजली, पानी और संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है।
राहत शिविरों में बढ़ने लगा बीमारियों का खतरा
इतने बड़े पैमाने पर विस्थापन के बाद अब प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय संकट गहराने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों और रेड क्रॉस की टीमों ने चेतावनी दी है कि शिविरों में अत्यधिक भीड़, वेंटिलेशन की कमी और पीने के साफ पानी की किल्लत के चलते संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ रहा है। प्रशासन का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) और दुनिया के अन्य देशों से मिल रही मदद के सहारे प्रभावितों तक भोजन, दवाइयां और जरूरी सामान पहुंचाने की हरसंभव कोशिश की जा रही है, हालांकि बुनियादी ढांचे के तबाह होने से बचाव दलों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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