इस्लामाबाद। पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में लंबे समय से सुलग रहा जन-आक्रोश रविवार को पूरी तरह भड़क उठा और इस पाक-विरोधी आंदोलन ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच हुई आमने-सामने की खूनी झड़प में गोलीबारी के दौरान एक नागरिक की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दर्दनाक घटना के बाद से पूरे सूबे में सुरक्षा हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं और आक्रोशित नागरिकों का हुजूम सड़कों पर उतरकर लगातार नारेबाजी कर रहा है।

स्थानीय नागरिकों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी हुकूमत ने इस पूरे क्षेत्र की अघोषित आर्थिक घेराबंदी (नाकाबंदी) कर दी है, जिसकी वजह से रोजमर्रा के जरूरी सामान और जीवनरक्षक दवाओं की भारी किल्लत हो गई है। इसके साथ ही, कई जिलों में इंटरनेट और मोबाइल संचार सेवाओं पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है, जिससे आम जनजीवन पंगु हो गया है। आंदोलनकारी इन तमाम पाबंदियों को फौरन हटाने, जेल में बंद अपने नेताओं की बिना शर्त रिहाई और पूर्व में हुए 38-सूत्रीय समझौते को अक्षरशः लागू करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

अवामी एक्शन कमेटी के आह्वान पर उमड़ा जनसैलाब

यह विशाल विरोध प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बैनर तले आयोजित किया गया था। आंदोलन को समर्थन देने के लिए मुजफ्फराबाद, रावलकोट, मीरपुर, डड्याल, डेराकोट, जीरो प्वाइंट, टियाट्री नोट और सरोजा जैसे प्रमुख शहरों में हजारों की तादाद में लोग जमा हुए। इसी दौरान 'अनब' नामक इलाके में जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ रहे थे, तो उन्हें रोकने के लिए पाकिस्तानी पुलिस और अर्धसैनिक बल (रेंजर्स) ने बर्बरता दिखाई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पहले आंसू गैस के गोले छोड़े गए और फिर सीधे फायरिंग शुरू कर दी गई। इस अंधाधुंध गोलीबारी में मोहम्मद याकूब नाम के एक स्थानीय व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई और कई अन्य लोग गोलियां लगने से घायल हो गए।

सुरक्षा बलों को पीछे धकेल प्रदर्शनकारियों ने किया कब्जा

डड्याल क्षेत्र में भी जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर देखा गया। जमीनी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की भारी तादाद और आक्रामक रुख के आगे पाकिस्तानी सुरक्षा बल टिक नहीं सके और उन्हें जान बचाकर पीछे हटना पड़ा। इसके बाद कुछ समय के लिए पूरे इलाके की प्रशासनिक व्यवस्था पर आंदोलनकारियों का कब्जा रहा। हालांकि, इस पूरे हिंसक घटनाक्रम और जन-विद्रोह को लेकर पाकिस्तानी हुकूमत या उनकी सैन्य एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फजीहत के डर से अब तक कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

आतंकवाद विरोधी कानून के तहत कार्रवाई से बिगड़े हालात

  • आंदोलन में तेजी: क्षेत्र में 3 और 4 जुलाई से इस पाक-विरोधी प्रदर्शन ने अभूतपूर्व गति पकड़ ली है, जिससे प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह ठप हो गया है।

  • नेताओं की धरपकड़: दरअसल, इस बड़े बवाल की शुरुआत तब हुई जब पाकिस्तानी प्रशासन ने दमनकारी नीति अपनाते हुए आतंकवाद निरोधक कानून के तहत 'जेएएसी' (JAAC) पर प्रतिबंध मढ़ दिया। इसके तुरंत बाद पूरे पीओके में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई और संगठन के शीर्ष नेता शौकत नवाज मीर समेत 600 से अधिक निर्दोष कार्यकर्ताओं और समर्थकों को सलाखों के पीछे डाल दिया गया।

प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि प्रशासन जानबूझकर राशन और दवाओं की सप्लाई रोककर इंसानी संकट पैदा कर रहा है, ताकि आंदोलन को कुचला जा सके। साथ ही इंटरनेट ब्लैकआउट करके वहां की वास्तविक तस्वीरें दुनिया के सामने आने से रोकी जा रही हैं। फिलहाल, बिगड़ते हालातों को देखते हुए चप्पे-चप्पे पर भारी तादाद में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है, लेकिन जनता का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है।