महाकुंभ 2025-मेले में बिछड़ने वालों को मिलाएगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
प्रयागराज । महाकुंभ 2025 में संगमनगरी के रेती पर बसने वाले विशाल तम्बुओं की नगरी को बसाने की तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है। महाकुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानियां नही होगी। इसके लिए मेला प्रशासन ने नया प्लान तैयार किया है। इस प्लान को पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है। मेला प्राधिकरण इस बार मेले में आने वाले श्रृद्धालुओं को उनके अपनों से बिछड़ने के बाद उनकी तलाश करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद लेगी। इसके उपयोग से बिछड़ने वालों को तलाश करने में आसानी होगी।
यह पहली बार हो रहा है। जो मेला क्षेत्र में अपनों से बिछड़े लोगों को मिलाने में मदद करेगा। इस तैयार किये गये प्लान में प्राधिकरण की मदद एमएनएनआईटी यानि मोती लाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कर रहा है। जिससे मेले के दौरान भटकने वालों को परेशानियां नही होंगी। मेला प्राधिकरण इसके लिए जियो टैगिंग का भी प्रयोग करेगा। महाकुंभ में देश के अलग-अलग राज्यों से करोड़ों की संख्या में आने वाले श्रृद्धालुओं को बोलचाल भाषा की भी सुविधा मेले में दी जाएगी। महाकुंभ की भीड़ में अक्सर लोग अपने परिवार या मित्रजनों से बिछड़ जाते हैं। अलग क्षेत्रीय भाषा होने के कारण उनकी भाषाओं को समझने में दिक्क़तें आने लगती है। इसको लेकर मेला प्राधिकरण की तरफ से भाषीणी एप का प्रयोग किया जा रहा है। जो अंग्रेजी समेत 11 क्षेत्रीय भाषाओं में लोगों के साथ जानकारी साझा करेगा और उनकी समस्याओं को दूर करेगा।
अपर मेलाधिकारी विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि इस एप की मदद से कोई भी अपनी क्षेत्रीय भाषा में सवाल करेगा, तो खोया पाया केंद्र में बैठे वालिंटियर को हिंदी में उसकी जानकारी मिलेगी। इसी प्रकार वालेंटियर जब हिंदी में संबंधित व्यक्ति को उसकी समस्या का समाधान बताएगा तो उनको उसकी क्षेत्रीय भाषा में जानकारी मिलेगी। अपर मेलाधिकारी ने बताया कि इस ऐप का उपयोग पहली बार महाकुंभ में किया जा रहा है। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान आने वाले लोगों को ठहरने की जगह से लेकर कहीं जाने तक की जानकारी उनकी अपनी क्षेत्रीय भाषा में यह एप उपलब्ध कराएगा। लोगों को अपने मोबाइल में इस एप को डाउनलोड करना होगा। जिससे उन्हे अपने करीबियों से मिलने में आसानी हो सकेगी।
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