बिजली विभाग पर गंभीर आरोप, कर्मचारी संगठनों ने खोला मोर्चा
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के घरों में जबरन स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाया जा रहा है। इसके जरिये बिजली कर्मियों को पूर्व से मिल रही रियायती बिजली सुविधा समाप्त की जा रही है। पदाधिकारियों ने कहा, यह सीएम के साथ हुए लिखित समझौते तथा उप्र पॉवर सेक्टर रिफॉर्म एक्ट का खुला उल्लंघन है। समिति ने कर्मचारियों के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाने के विरोध में सोमवार को सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा गया। पदाधिकारियों ने बताया कि 25 जनवरी 2000 को तत्कालीन मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्त के साथ हुए लिखित समझौता हुआ था कि बिजली कर्मियों को मिल रही रियायती बिजली की सुविधा मिलती रहेगी। इसी समझौते के आधार पर बनी ट्रांसफर स्कीम, 2000 में भी कर्मचारियों को पूर्ववत सुविधाएं जारी रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। संघर्ष समिति ने एलान किया है कि 26 फरवरी को लखनऊ में होने वाली प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे को लेकर आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा भार
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डालने का आरोप लगाया है। कहा, यह वसूली कभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर तो कभी ईंधन अधिभार के नाम पर हो रही है। भविष्य में स्मार्ट प्रीपेड मीटर में तकनीक उन्नयन खर्च उपभोक्ताओं से लिया जाएगा या नहीं इस पर पॉवर कॉर्पोरेशन स्पष्टीकरण जारी करे। भविष्य में अगर कंपनियों ने इसका भार उपभोक्ताओं पर डाला तो हर माह 5 से 10 फीसदी अतिरिक्त बिजली बिल देना होगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2019 में स्मार्ट मीटर लगाने की शुरुआत 2जी एवं 3जी तकनीक आधारित मीटरों से की गई थी। परिषद की आपत्ति के बाद विद्युत नियामक आयोग ने स्पष्ट किया था कि तकनीकी उन्नयन की जिम्मेदारी एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड की होगी। अब पहले से लगे करीब 12 हजार मीटरों को बदलने का खर्च संबंधित कंपनी नहीं उठा रही है बल्कि मीटरों को रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम (आरडीएसएस) में बदला जा रहा है। अब तक आरडीएसएस योजना में 2.80 करोड़ उपभोक्ताओं के घरों में 4जी तकनीक आधारित स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। सवाल उठता है कि भविष्य में तकनीक बदलेगी तो क्या उसका खर्च उपभोक्ताओं पर ही डाला जाएगा? उन्होंने पॉवर कॉर्पोरेशन से इसका स्पष्टीकरण मांगा है। कहा, अगर बिजली कंपनियां नियामक आयोग से मीटर शुल्क को टैरिफ में शामिल करवा लेती हैं तो हर महीने उपभोक्ताओं को प्रति मीटर लगभग 100 रुपये से ज्यादा का भुगतान करना होगा। इससे साफ है कि स्मार्ट मीटर बदलने का खर्च सीधे उपभोक्ताओं से वसूला जाएगा। जबकि भारत सरकार ने स्पष्ट किया था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर का खर्च आम जनता पर नहीं डाला जाएगा। अब कंपनियां दूसरे माध्यमों से इसका व्यय उपभोक्ताओं पर स्थानांतरित कर रही हैं।
नीट के बाद नई उड़ान : सैन्य नर्सिंग सेवा से अधिकारी बनने का अवसर नीट के बाद डॉक्टर ही नहीं, भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने का भी सुनहरा अवसर : बेटियों के लिए सैन्य नर्सिंग सेवा का संपूर्ण मार्गदर्शन ✍️ डॉ नयन प्रकाश गांधी ,भारत के प्रतिष्ठित करियर कोच ,पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट
राशिफल 25 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
तेंदूपत्ता संग्राहकों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की ओर छत्तीसगढ़
सी.एम. हेल्पलाइन की शिकायत का त्वरित समाधानः सौर सुजला योजना का सोलर पंप चालू होने से लौटी किसान के खेतों की रौनक
तकनीक, समन्वय और प्रशिक्षित पुलिस बल के दम पर होगा सुरक्षित एवं व्यवस्थित सिंहस्थ-2028 - डीजीपी कैलाश मकवाणा
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से होमेश्वर प्रसाद जायसवाल को मिली राहत, शून्य हुआ बिजली बिल