यूक्रेन संघर्ष का असर: रूस ने अपने ऊर्जा निर्यात पर लगाया नियंत्रण
व्यापार: यूक्रेन के ड्रोन हमलों के कारण रूस की तेल शोधन (रिफाइनिंग) क्षमता में भारी गिरावट आई है। कुछ दिनों में ही यह गिरावट लगभगत पांचवां हिस्सा तक पहुंच गई, जिससे रूस के प्रमुख बंदरगाहों से ईंधन का निर्यात भी प्रभावित हुआ है। इन हालात के बीच रूस ने डीजल और पेट्रोल के निर्यात पर आंशिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है, जो साल के अंत तक लागू रहेगा। उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने गुरुवार को यह घोषणा की।
नोवाक ने कहा, हम पेट्रोल निर्यात पर प्रतिबंध को साल के अंत तक बढ़ाएंगे और डीजल ईंधन के गैर-उत्पादकों के लिए निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा। इससे घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति बढ़ेगी। उन्होंने यह भी बताया कि देश में तेल उत्पादों की थोड़ी कमी है, लेकिन मौजूदा भंडार से मांग पूरी नहीं की जा सकती है।
इस बीच, रूस के नियंत्र वाले क्रीमिया के प्रमुख सर्गेई अक्स्योनोव ने बताया कि ईंधन की आपूर्ति में बाधा रिफाइनरियों के बंद होने के कारण आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, डीजल निर्यात पर लगा नया प्रतिबंध मुख्य रूप से बिचौलियों पर लागू होता है, न कि उत्पादकों पर। लेकिन रूस से डीजल का बड़ा हिस्सा सीधे उत्पादकों द्वारा उत्तरी और दक्षिण पाइपलाइनों के जरिये बाल्टिक और काला सागर के बंदरगाहों तक पहुंचाया जाता है।
2024 में रूस ने लगभग 86 मिलियन मीट्रिक टन डीजल का उत्पादन किया, जिसमें से करीब 31 मिलियन टन का निर्यात हुआ। समुद्री मार्ग से डीजल निर्यात करने वाले देशों में रूस और अमेरिका शीर्ष पर रहे हैं। वहीं, पेट्रोल के निर्यात पर लगा प्रतिबंध उत्पादकों और बिचौलियों दोनों पर लागू होगा। हालांकि, यह प्रतिबंध अन्य देशों के साथ रूस के अंतर-सरकारी समझौतों पर लागू नहीं होगा।
रूस में ईंधन की कमी तेजी से बढ़ रही है। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, देश की दूसरी सबसे बड़ी तेल कंपनी लुकोइल ने मॉस्को के कुछ पेट्रोल पंपों पर जैरी कैन (डिब्बे) में पेट्रोल बेचने पर रोक लगा दी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूसी तेल की खरीद पर आपत्ति जता रहे हैं।
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