वाराणसी के गांवों ने स्वच्छता में दिखाया कमाल, राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान
वाराणसी। देश के ग्रामीण अंचलों में स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बृहस्पतिवार को जारी की गई आधिकारिक रैंकिंग में वाराणसी ने एक बार फिर बड़ी सफलता हासिल की है। 'स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2025' में वाराणसी को सेंट्रल जोन (मध्य क्षेत्र) का सर्वश्रेष्ठ जिला घोषित किया गया है। इसके साथ ही, इस अभियान में शानदार सामूहिक प्रदर्शन के दम पर उत्तर प्रदेश पूरे देश के राज्यों की श्रेणी में पहले पायदान पर रहा। गांवों में शौचालयों के नियमित इस्तेमाल, ठोस व तरल कचरा प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट), सार्वजनिक चौराहों की स्वच्छता, व्यक्तिगत स्वच्छता (हाथ धोने की आदत) और सरकारी कामकाज पर नागरिकों की संतुष्टि जैसे कड़े पैमानों पर वाराणसी का प्रदर्शन सबसे अव्वल पाया गया।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने जारी की रिपोर्ट; सीडीओ ने दी जानकारी
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2025 की यह विस्तृत रिपोर्ट जारी की गई है। वाराणसी के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) प्रखर कुमार सिंह ने इस बड़ी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत यह राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण देश के गांवों में साफ-सफाई की वास्तविक और जमीनी हकीकत का आकलन करने के लिए आयोजित किया गया था। इस बार के सर्वे में ग्रामीण क्षेत्रों में कम्युनिटी टॉयलेट्स की स्थिति, गीले और सूखे कचरे का उचित निपटारा और विकास कार्यों से जनता की संतुष्टि को मुख्य आधार बनाया गया था, जिसमें वाराणसी प्रशासन और ग्रामीणों की मेहनत रंग लाई है।
देशभर के 744 जिलों और 20 हजार से ज्यादा गांवों का हुआ महासर्वे
इस राष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, देश के कुल 744 जिलों और 20,659 गांवों को इस सर्वेक्षण के दायरे में शामिल किया गया था। जांच टीमों ने धरातल पर जाकर 3,22,033 ग्रामीण परिवारों के घरों और 1,03,607 सार्वजनिक संस्थानों— जिनमें स्कूल, धार्मिक स्थल, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र और सामुदायिक शौचालय परिसर शामिल थे— का सीधा निरीक्षण किया।
वाराणसी और देश के ग्रामीण क्षेत्रों से निकले मुख्य आंकड़े (फैक्ट फाइल):
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शौचालयों का बढ़ता उपयोग: सर्वे के मुताबिक, करीब 93 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास अब खुद के शौचालय की सुविधा उपलब्ध हो चुकी है। सबसे सुखद बात यह है कि इनमें से 95 प्रतिशत परिवार रोजाना और नियमित रूप से इन शौचालयों का उपयोग कर रहे हैं।
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स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता: ग्रामीण अंचलों में बीमारियों से बचाव को लेकर जागरूकता बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, 98 प्रतिशत परिवार भोजन करने या अन्य समय पर सुरक्षित तरीके से हाथ धोते हुए पाए गए, जिनमें से 88 प्रतिशत लोग हाथ धोने के लिए साबुन और पानी दोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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कचरे से कमाई और वर्गीकरण: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बढ़ते हुए 58 प्रतिशत ग्रामीण परिवार अब अपने घरों में ही गीले (जैविक) और सूखे (अजैविक) कचरे को अलग-अलग डस्टबिन में इकट्ठा कर रहे हैं। वहीं, 47 प्रतिशत परिवार सूखे और रीसायकल होने वाले कचरे को कबाड़ी वालों को बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी कर रहे हैं।
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सामुदायिक परिसरों की स्थिति: देश के 39 प्रतिशत गांवों में 'कम्युनिटी सैनिटरी कॉम्प्लेक्स' (सामुदायिक स्वच्छता परिसर) बनकर तैयार हो चुके हैं, जिनमें से 98 प्रतिशत पूरी तरह चालू हालत में काम कर रहे हैं। इन परिसरों में से 70 प्रतिशत से अधिक शौचालयों को पूरी तरह साफ और उपयोग के लायक पाया गया, जिसके लिए स्थानीय सफाईकर्मियों की विशेष सराहना की गई है।
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