वन स्टॉप सेंटर राजगढ़ में माता पूजन एवं कन्या भोज का आयोजन*
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*आश्रय प्राप्त महिला ने परिवार के साथ घर लौटने की जताई सहमति*
*राजगढ़
महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित वन स्टॉप सेंटर (सखी केंद्र), राजगढ़ में नवरात्रि के पावन अवसर पर माता पूजन एवं कन्या भोज का आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ नारी सम्मान, मातृत्व, मानवीय संवेदनाओं और सकारात्मक वातावरण को प्रोत्साहित करना रहा।
माता पूजन से जागृत हुई ममत्व की भावना वन स्टॉप सेंटर में आश्रय प्राप्त कर रही एक महिला के जीवन में इस आयोजन के दौरान भावनात्मक परिवर्तन देखने को मिला। उक्त महिला पिछले पाँच माह से अपने पति एवं तीन बच्चों (दो बालिकाओं और एक बालक) से अलग रह रही थी तथा अपने भाई के साथ थी। उसके तीनों बच्चे अपने पिता के साथ रह रहे थे।
माता पूजन एवं कन्या भोज के दौरान देवी स्वरूपा कन्याओं के पूजन और मातृत्व से जुड़े भावनात्मक वातावरण ने महिला को प्रभावित किया। इस अवसर पर उसके मन में अपने बच्चों के प्रति ममत्व एवं परिवार के साथ पुनः जुड़ने की भावना जागृत हुई। इसके परिणामस्वरूप महिला ने अपने परिवार के साथ घर लौटने की सहमति व्यक्त की। यह प्रसंग दर्शाता है कि आत्मीय वातावरण, संवेदनशील व्यवहार और उचित परामर्श व्यक्ति को सकारात्मक निर्णय लेने में सहयोग प्रदान कर सकते हैं।
महिला को भावनात्मक संबल प्रदान करने एवं परामर्श के माध्यम से सकारात्मक निर्णय लेने में सहयोग करने में वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक श्रीमती रश्मि चौहान, केस वर्कर श्रीमती स्मिता शुक्ला एवं काउंसलर श्रीमती कविता वर्मा की विशिष्ट भूमिका रही।टीम द्वारा महिला की परिस्थितियों को संवेदनशीलता से समझते हुए आवश्यक परामर्श, मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान किया गया।
कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा के निर्देशन और मार्गदर्शन में वन स्टॉप सेंटर का संचालन किया जाता है वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य संकटग्रस्त महिलाओं एवं बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनना, उन्हें मानसिक संबल देना तथा उनकी इच्छा, सुरक्षा और परिस्थितियों के अनुरूप पुनर्वास के प्रयास करना है।
महिलाओं को एक ही स्थान पर मिलती हैं विभिन्न सुविधाएँ
वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से हिंसा एवं संकट से प्रभावित महिलाओं और बालिकाओं को चिकित्सा सहायता, पुलिस सहायता, विधिक सहायता, मनोसामाजिक परामर्श तथा अस्थायी आश्रय जैसी सुविधाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती हैं। केंद्र द्वारा प्रत्येक प्रकरण में संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ आवश्यक कार्रवाई कर पीड़ित महिलाओं को सहायता, संरक्षण एवं न्याय दिलाने के लिए प्रयास किए जाते हैं।