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बायोगैस संयंत्र से ऊर्जा और जैविक समृद्धि की ओर कदम बढ़ाते किसान महेंद्र*

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बायोगैस संयंत्र से ऊर्जा और जैविक समृद्धि की ओर कदम बढ़ाते किसान महेंद्र*



 *‘’कहानी बदलाव की’’* 


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 *बायोगैस से ईंधन की बचत, जैविक स्लरी से बढ़ा फसल उत्पादन* 


 *बायोगैस संयंत्र से ऊर्जा बचत के साथ भूमि की बढ़ी उर्वरता* 


 *राजगढ़ 18 सितम्‍बर, 2026* 


जिले के विकासखंड ब्यावरा के ग्राम बेलास निवासी श्री महेंद्र ने बायोगैस योजना का लाभ लेकर घरेलू ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के साथ अपनी खेती को भी अधिक लाभदायक और टिकाऊ बनाया है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने परिसर में बायोगैस संयंत्र स्थापित कराया और उसका नियमित रूप से कुशल संचालन कर रहे हैं। बायोगैस संयंत्र से श्री महेंद्र प्रतिदिन औसतन 8 घंटे भोजन पकाने एवं अन्य घरेलू कार्यों में स्वच्छ ईंधन का उपयोग कर रहे हैं। इससे एलपीजी सिलेंडर और लकड़ी पर उनकी निर्भरता समाप्त हो गई है तथा ईंधन पर होने वाले खर्च में भी सीधी बचत हो रही है।


इस संयंत्र की एक और खास उपलब्धि बायोगैस से निकलने वाली जैविक स्लरी है। श्री महेंद्र इस स्लरी का नियमित रूप से अपनी फसलों में जैविक खाद के रूप में उपयोग कर रहे हैं। इससे महंगे रासायनिक उर्वरकों पर उनकी निर्भरता और खेती की लागत कम हुई है। जैविक स्लरी के उपयोग से भूमि की उर्वरता में सुधार के साथ फसलों के उत्पादन एवं गुणवत्ता में भी वृद्धि हुई है।


श्री महेंद्र का अनुभव बताता है कि बायोगैस संयंत्र केवल घरेलू ईंधन की जरूरत पूरी करने का साधन नहीं, बल्कि खेती को कम लागत वाली और पर्यावरण अनुकूल बनाने का प्रभावी माध्यम भी है। एक ही पहल से उन्हें स्वच्छ ऊर्जा, ईंधन की बचत, जैविक खाद और बेहतर कृषि उत्पादन का लाभ मिल रहा है। उनका यह प्रयास अन्य किसानों के लिए भी शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर एवं टिकाऊ कृषि की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा बन रहा है।