सात शताब्दियों से आस्था का दीप जला रहा होड़ा माता मंदिर*
*‘’देवधरा राजगढ़’’*
*‘’हर मंदिर की कहानी, आस्था की जुबानी’’*
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*मध्यप्रदेश और राजस्थान के श्रद्धालुओं की साझा आस्था का प्रमुख केंद्र है दंड ग्राम स्थित होड़ा माता मंदिर*
*राजगढ़ 30 सितम्बर, 2026*
जहां आस्था प्रकृति से मिलती है और लोकविश्वास पीढ़ियों की परंपराओं से जुड़कर विरासत का स्वरूप ले लेता है, वही भूमि ‘देवधरा राजगढ़’ की पहचान बनती है। राजगढ़ जिले के दंड ग्राम में पहाड़ियों के बीच स्थित प्रसिद्ध होड़ा माता मंदिर इसी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। राजस्थान की सीमा से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह प्राचीन मंदिर मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के श्रद्धालुओं के लिए समान रूप से श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। लगभग 700 वर्ष प्राचीन माने जाने वाले इस धार्मिक स्थल पर वर्षभर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। माता के दर्शन, पूजन और आशीर्वाद के लिए मध्यप्रदेश के साथ राजस्थान से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। पहाड़ी पर स्थित मंदिर का प्राकृतिक परिवेश श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक अनुभूति को और गहरा करता है।
*विजयासन स्वरूप की मान्यता, होड़ा माता के नाम से प्रसिद्ध हुआ दरबार*
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर में विराजित देवी मां दुर्गा के विजयासन स्वरूप की आराधना की जाती है। जनश्रुति है कि महिषासुर एवं रक्तबीज जैसे राक्षसों का वध कर विजय प्राप्त करने के पश्चात माता ने पहाड़ियों पर आसन ग्रहण किया था। विजय के आसन पर विराजमान होने के कारण उन्हें विजयासन माता के रूप में श्रद्धा से स्मरण किया गया। कालांतर में स्थानीय लोकपरंपराओं और जनश्रुतियों के माध्यम से माता का यह दरबार ‘होड़ा माता’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
*घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच आस्था की शुरुआत*
स्थानीय बुजुर्गों एवं पुजारियों के अनुसार, लगभग सात शताब्दी पूर्व यह क्षेत्र घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरा हुआ था। उस समय यहां माता की छोटी-सी पिंडी अथवा चबूतरे पर श्रद्धालु पूजा-अर्चना किया करते थे। दंड ग्राम सहित आसपास के ग्रामीणों और चरवाहों की माता के प्रति गहरी आस्था रही है। स्थानीय मान्यता है कि माता ने अपने भक्तों की रक्षा के लिए इस पहाड़ी को अपना निवास स्थान बनाया। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही इसी आस्था ने कालांतर में इस स्थान को एक प्रमुख धार्मिक केंद्र का स्वरूप प्रदान किया।
*सीमा नहीं, आस्था जोड़ती है दो राज्यों के श्रद्धालुओं को*
राजस्थान सीमा के निकट स्थित होने के कारण होड़ा माता मंदिर की आस्था मध्यप्रदेश और राजस्थान की साझा सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी हुई है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार रियासतकाल में इस मार्ग से गुजरने वाले राजा-महाराजा, सैनिक और ग्रामीण भी माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते थे। समय बदला, परिस्थितियां बदलीं, लेकिन माता के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था आज भी उसी भाव से कायम है। मध्यप्रदेश और राजस्थान के ग्रामीणों के लिए होड़ा माता का दरबार केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि साझी परंपरा, विश्वास और सांस्कृतिक जुड़ाव का केंद्र है।
*जनसहयोग से बनी सीढ़ियां, आस्था ने बनाया मार्ग*
पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचने का मार्ग श्रद्धालुओं के लिए पहले कठिन रहा है। मंदिर तक पहुंचने वाली लगभग 200 सीढ़ियों के निर्माण एवं सुधार में मध्यप्रदेश और राजस्थान के ग्रामीणों ने जनसहयोग से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आपसी सहयोग से राशि एकत्रित कर सीढ़ियों का निर्माण कराया जाना ग्रामीणों की एकजुटता, समर्पण और माता के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रेरक उदाहरण है। यह सीढ़ियां केवल मंदिर तक पहुंचने का मार्ग नहीं, बल्कि पीढ़ियों की आस्था, जनसहयोग और सामुदायिक एकता की कहानी भी कहती हैं।
*देवधरा राजगढ़ की धार्मिक विरासत में विशेष स्थान*
प्राकृतिक सौंदर्य, प्राचीन परंपराओं और लोकआस्था से समृद्ध राजगढ़ जिले में होड़ा माता मंदिर धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। पहाड़ियों के बीच स्थित यह प्राचीन आस्था स्थल आज भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। सात शताब्दियों से जलती आस्था की ज्योति, दो राज्यों के श्रद्धालुओं को जोड़ता विश्वास और जनसहयोग से संवरती परंपरा—होड़ा माता मंदिर ‘देवधरा राजगढ़’ की उस समृद्ध विरासत का परिचायक है, जहां आस्था की कोई सीमा नहीं होती।