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सफलता की कहानी’’* *कच्चे गोबर को वर्मीकम्पोस्ट में बदलकर किसानों को आमदनी से जोड़ रहा ‘कृषक सारथी’*

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सफलता की कहानी’’*      *कच्चे गोबर को वर्मीकम्पोस्ट में बदलकर किसानों को आमदनी से जोड़ रहा ‘कृषक सारथी’*



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 *राजगढ़ 14 अक्‍टूबर,  2026* 


कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा के निर्देशन में स्टार्टअप इंडिया के मार्गदर्शन एवं सहयोग से कृषि क्षेत्र में नवाचार के माध्यम से किसानों को कृषि व्यापार से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। इसी दिशा में डॉ. सुमित गौड़ (कृषि अर्थशास्त्र) के नेतृत्व में ‘कृषक सारथी’ डेटा, शोध एवं मैदानी अनुभव के आधार पर किसानों के लिए वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन एवं विपणन का मॉडल विकसित कर रहा है। डॉ. गौड़ ने बताया कि किसानों के सामने कच्चे गोबर के उचित प्रबंधन की चुनौती रहती है। खेत में सीधे कच्चा गोबर डालने से खरपतवार, कीट एवं रोग की समस्या बढ़ने के साथ रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता बढ़ती है। कृषक सारथी इसी कच्चे गोबर को वर्मीकम्पोस्ट में परिवर्तित कर किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का माध्यम बना रहा है।


उन्होंने बताया कि वर्तमान में कृषक सारथी पैन इंडिया स्तर पर 6 राज्यों के 15-16 जिलों में 15 हजार से अधिक किसानों के साथ जुड़ा है। जिन किसानों अथवा गौशालाओं के पास पर्याप्त मात्रा में गोबर उपलब्ध है, वहां न्यूनतम 250 क्विंटल से लेकर 2 हजार क्विंटल तक वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन की इकाइयां स्थापित की जाती हैं। कंपनी द्वारा उत्पादन की 100 प्रतिशत गारंटी के साथ संबंधित क्षेत्र में विपणन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाती है। इसी क्षेत्र के किसानों को गुणवत्तापूर्ण कम्पोस्ट बाजार मूल्य की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत कम कीमत पर उपलब्ध कराया जाता है। इससे स्थानीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होने के साथ गुणवत्तापूर्ण कम्पोस्ट की उपलब्धता सुनिश्चित होती है। उत्पादक क्लस्टर के माध्यम से बी-टू-बी आधार पर निर्यात की मांग भी पूरी की जा रही है। तकनीकी एवं आर्थिक प्रबंधन के आधार पर वर्मीकम्पोस्ट की उत्पादन लागत लगभग 1.50 रुपये प्रति किलोग्राम तक रखी गई है।


कृषक सारथी के माध्यम से वर्तमान में 4 प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां तथा पैन इंडिया स्तर पर 50 से अधिक एमएसएमई सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही 150 से अधिक कृषि विद्यार्थी एवं विशेषज्ञ भी इस पहल से जुड़े हैं। स्टार्टअप इंडिया के सेमिनारों एवं मार्गदर्शन के माध्यम से इस मॉडल को देश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। डॉ. गौड़ ने कहा कि स्टार्टअप इंडिया ने युवाओं के लिए नवाचार एवं उद्यमिता के माध्यम से शून्य से शिखर तक पहुंचने के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। सरकार के सहयोग और उचित मार्गदर्शन से कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देते हुए किसानों की आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।