कोटा की माटी से निकला नेतृत्व: जनसेवक विधायक संदीप शर्मा का संगठन से विधानसभा तक का अटूट सफर - जन्मदिवस विशेष*
*विधायक संदीप शर्मा जन्मदिवस विशेष*✍️
*
*✍️ डॉ. नयन प्रकाश गांधी | पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट एवं युवा विश्लेषक*
कोटा की माटी से निकला नेतृत्व: जनसेवक विधायक संदीप शर्मा का संगठन से विधानसभा तक का अटूट सफर -जन्मदिवस विशेष
✍️ डॉ. नयन प्रकाश गांधी पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट एवं युवा विश्लेषक
कोटा, जो देश में शिक्षा नगरी, औद्योगिक नगरी और चंबल की सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, उसकी राजनीति में सादगी और जमीन से जुड़े नेतृत्व की हमेशा मांग रही है। इसी मांग पर खरे उतरते हैं कोटा दक्षिण के विधायक संदीप शर्मा। एक ऐसा नाम जो किसी राजनीतिक परिवार की विरासत से नहीं, बल्कि संगठन की पाठशाला में तपकर और जनता के बीच रहकर बना है। 2014 से 2023 तक लगातार तीन बार विधानसभा पहुंचना सिर्फ जीत नहीं, बल्कि जनता के भरोसे की हैट्रिक है।
➡️संगठन की भट्टी में तपकर निकला नेतृत्व
संदीप शर्मा का राजनीतिक जीवन शॉर्टकट का नहीं, बल्कि संघर्ष और समर्पण का परिणाम है। युवावस्था में ही वे सामाजिक सरोकारों और छात्र गतिविधियों से जुड़ गए। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और युवा मोर्चा के माध्यम से एवं राजनीतिक गुरु वर्तमान माननीय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला दे उन्होंने नेतृत्व के गुण सीखे,राजनीति में मिलनसारिता के प्रभाव को समझा ।
भारतीय जनता पार्टी में एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने का काम किया। पर्चा बांटने से लेकर दीवार लेखन तक, मंडल की बैठकों से लेकर जनसंपर्क तक, हर जिम्मेदारी को उन्होंने निष्ठा से निभाया। यही कारण है कि पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व, विशेषकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें अपना विश्वासपात्र शिष्य माना।
2014 एक निर्णायक मोड़ था। जब ओम बिरला जी कोटा-बूंदी से सांसद चुने गए तो कोटा दक्षिण विधानसभा सीट खाली हुई। उस समय भाजपा ने एक युवा और जमीनी चेहरे पर दांव लगाया - संदीप शर्मा। उन्होंने उपचुनाव में बड़ी जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। यह जीत इस बात का प्रमाण थी कि जनता संगठन से निकले कार्यकर्ता को पसंद करती है।इसके बाद असली परीक्षा 2018 में थी। प्रदेश में कांग्रेस की लहर थी, कई दिग्गज अपनी सीटें हार गए, लेकिन संदीप शर्मा ने कोटा दक्षिण के किले को बचाए रखा। 2023 में उन्होंने 11,900 से अधिक मतों के अंतर से जीतकर हैट्रिक पूरी की और यह सिद्ध कर दिया कि यह सीट अब उनकी कर्मभूमि बन चुकी है।
➡️सिर्फ विधायक नहीं, कोटा के मुद्दों के प्रहरी
शर्मा की पहचान सिर्फ जीतने वाले विधायक की नहीं, बल्कि विधानसभा में कोटा की आवाज बुलंद करने वाले जनप्रतिनिधि की है। उन्होंने सदन में ऐसे मुद्दे उठाए जो सीधे आम आदमी की जिंदगी से जुड़े हैं।
1. वार्डों का विकास और नगर निगम का बजट: अक्सर विकास के बड़े प्रोजेक्ट चमकते हैं, लेकिन गली-मोहल्ले की सड़क, नाली और लाइट वहीं की वहीं रह जाती है। संदीप शर्मा ने शून्यकाल में इस दर्द को उठाया। उन्होंने कहा कि कोटा नगर निगम के दो हिस्सों में बंटने के बाद भी वार्ड समितियों का गठन नहीं हुआ और बजट का बंटवारा असमान है। उनकी इस मांग का सीधा असर दक्षिण के वार्डों में विकास कार्यों को गति देने पर पड़ा।
2. धार्मिक आस्था और सार्वजनिक स्वच्छता: कोटा की संस्कृति में मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों का विशेष महत्व है। जब इन स्थलों के पास नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से मांस की दुकानें और अतिक्रमण होने लगा, तो संदीप शर्मा ने विधानसभा में इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की। यह सिर्फ अतिक्रमण का नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक मर्यादा और स्वच्छता का सवाल था।
3. विरासत का संरक्षण - मंदिरों का जीर्णोद्धार: कोटा सिर्फ कोचिंग नहीं, रियासतकालीन इतिहास भी है। मथुराधीश मंदिर, चार धाम मंदिर, और रियासत काल के सैकड़ों छोटे मंदिर जर्जर हो रहे थे। विधायक शर्मा ने देवस्थान विभाग से बजट की मांग कर मथुराधीश कॉरिडोर सहित प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार का मुद्दा उठाया। उनका तर्क था कि अगर विरासत नहीं बचेगी तो कोटा की पहचान अधूरी रह जाएगी, और जर्जर इमारतें कभी भी हादसे का कारण बन सकती हैं।
3. कोचिंग हब की सुरक्षा - विद्यार्थियों का भरोसा: देश भर से लाखों विद्यार्थी कोटा आते हैं। जब शहर में चाकूबाजी और नशे की घटनाएं बढ़ीं तो सबसे पहले आवाज संदीप शर्मा ने उठाई। उन्होंने विधानसभा और प्रशासनिक बैठकों में पुलिस गश्त बढ़ाने, छात्रावासों की सुरक्षा ऑडिट और कोचिंग क्षेत्रों में सीसीटीवी नेटवर्क मजबूत करने की मांग की, ताकि कोटा की छवि एक सुरक्षित शिक्षा नगरी के रूप में बनी रहे।
4.भविष्य का कोटा - जल और नियोजन: वे केवल आज की नहीं, कल की भी सोचते हैं। शहरी विकास विधेयकों पर चर्चा के दौरान उन्होंने सीवरेज, ड्रेनेज और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य करने की बात कही। उनका मानना है कि कोटा का विस्तार बिना प्लानिंग के हुआ तो आने वाले समय में जल संकट और ट्रैफिक जाम बड़ी समस्या बन जाएंगे।
➡️कार्यशैली - सुलभता ही सबसे बड़ी ताकत
संदीप शर्मा की सबसे बड़ी पूंजी उनकी सुलभता है। वे एसी कमरों के नेता नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने वाले जनसेवक हैं। किसी वार्ड में पानी की लाइन फटे या किसी कॉलोनी में लाइट की समस्या हो, वे खुद मौके पर पहुंच जाते हैं। कार्यकर्ताओं के लिए उनका दरवाजा हमेशा खुला है। यही कारण है कि भाजपा का कैडर उनके साथ मजबूती से खड़ा रहता है।
आज जन्मदिवस के अवसर पर कोटा दक्षिण की जनता उनसे यही उम्मीद करती है कि वे अपने राजनीतिक गुरु माननीय लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला की सीख , 'विकास और सेवा' - को आगे बढ़ाते हुए कोटा को औद्योगिक, शैक्षणिक और पर्यटन हब के रूप में राष्ट्रीय मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करेंगे।
सादगी, संगठन निष्ठा और संघर्ष - यही संदीप शर्मा की राजनीति का सार है,आज उनके प्रभावशाली ऊर्जावान सेवाभावी व्यक्तित्व ,मिलनसारिता के गुणों ने ही कोटा दक्षिण के जन जन में एक विशेष छाप छोड़ी है ।