बालिका दिवस से पहले कन्या शाला, राजगढ़ में बाल विवाह रोकथाम और किशोरी स्वास्थ्य पर जागरूकता कार्यक्रम
, विद्यार्थियों और स्टाफ ने ली सामूहिक शपथ
राजगढ़। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस (11 अक्टूबर) से एक दिन पहले, 10 अक्टूबर को कन्या शाला, राजगढ़ में बाल विवाह की रोकथाम और बालिकाओं के अधिकारों, स्वास्थ्य व पोषण पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम FMCH की ओर से हुआ और प्राचार्या श्रीमती खंडेलवाल एवं उप-प्राचार्य श्री नामदेव के सान्निध्य में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में श्री सत्यप्रकाश विश्वकर्मा ने प्रस्तुति के माध्यम से विषय को सरल भाषा में समझाया। लगभग डेढ़ घंटे चले इस कार्यक्रम में लगभग 80 से 100 विद्यार्थियों ने भाग लिया। इसमें बालिकाओं के अधिकार, बाल विवाह की कानूनी आयु (लड़की के लिए 18 और लड़के के लिए 21 वर्ष) और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की सामान्य जानकारी दी गई।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6, 2023–24) के अनुसार भारत में 20–24 वर्ष की लगभग 20.1% महिलाओं का विवाह 18 वर्ष से पहले हुआ, जो NFHS-5 (2019–21) में लगभग 23.3% था। मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा NFHS-4 (2015–16) में लगभग 32.4% था, जो NFHS-5 (2019–21) में घटकर लगभग 23.1% रहा। बताया गया कि प्रगति हुई है, लेकिन समस्या अभी समाप्त नहीं हुई है।
FMCH का मुख्य उद्देश्य पोषण को बढ़ावा देना है। इसी संदर्भ में बताया गया कि स्वस्थ और पोषित किशोरी ही स्वस्थ माँ और स्वस्थ शिशु की नींव बनती है। कम उम्र में विवाह और गर्भधारण से मातृ मृत्यु, शिशु मृत्यु और कम वजन के शिशु जैसे जोखिम बढ़ सकते हैं, इसलिए किशोरियों को पढ़ने, बढ़ने और अपने भविष्य के निर्णय लेने का पूरा अवसर मिलना जरूरी है। विद्यार्थियों को ASHA/ANM, आंगनवाड़ी और स्कूल की भूमिका तथा मदद के लिए Child Helpline 1098, आपात स्थिति में 112, Women Helpline 181 और कानूनी सहायता 15100 की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम दो-तरफा संवाद के रूप में रहा। विद्यार्थियों ने रुचि के साथ अपने अधिकारों से जुड़े प्रश्न पूछे और उनकी प्रतिक्रिया बहुत अच्छी रही। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों और स्टाफ ने बाल विवाह रोकने में सहयोग की सामूहिक शपथ ली।
कार्यक्रम का संदेश रहा: "उसके सपनों को तारीख दें, शादी की तारीख नहीं।"