बाल सगाई एवं झगड़ा मांगने के विवाद का वन स्टॉप सेंटर ने कराया सौहार्दपूर्ण निराकरण*
*राजगढ़ 25 सितम्बर, 2026*
कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा के निर्देशन में महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती अंशु बाला मसीह के मार्गदर्शन में संचालित वन स्टॉप सेंटर (सखी) राजगढ़ द्वारा महिलाओं एवं बालिकाओं से संबंधित पारिवारिक एवं आपसी विवादों के समाधान की दिशा में एक और सराहनीय पहल की गई। वन स्टॉप सेंटर प्रशासक श्रीमती रश्मि चौहान के सकारात्मक प्रयासों एवं समझाइश से बचपन में हुई बाल सगाई से उत्पन्न विवाद का सौहार्दपूर्ण निराकरण संभव हुआ। परिवर्तित नाम गीता द्वारा वन स्टॉप सेंटर में शिकायती आवेदन प्रस्तुत कर बताया गया कि बचपन में उसके परिजनों द्वारा परिवर्तित नाम गोपाल के साथ उसकी सगाई कर दी गई थी तथा बालिग होने पर विवाह तय किया गया था। वर्तमान में गीता 18 वर्ष से कम आयु की होने के साथ अपनी पढ़ाई एवं नर्सिंग प्रशिक्षण कर रही है। गोपाल के परिजनों द्वारा विवाह के लिए उसके माता-पिता पर दबाव बनाया जा रहा था तथा विवाह नहीं करने की स्थिति में झगड़ा मांगने की बात कही जा रही थी। इस विवाद के चलते दोनों पक्षों के बीच तनाव उत्पन्न हुआ तथा संबंधित थाने में शिकायत एवं एफआईआर भी दर्ज कराई गई।
गीता ने वन स्टॉप सेंटर में बताया कि वह वर्तमान में पढ़ाई एवं नर्सिंग प्रशिक्षण कर रही है तथा वह गोपाल से विवाह नहीं करना चाहती। वह अपने जीवन से संबंधित निर्णय स्वयं लेना चाहती है। शिकायती आवेदन पर वन स्टॉप सेंटर की केस वर्कर श्रीमती गुंजा सक्सेना द्वारा अनावेदक पक्ष से दूरभाष के माध्यम से संपर्क कर दोनों पक्षों को वन स्टॉप सेंटर कार्यालय में उपस्थित होने हेतु कहा गया। दोनों पक्ष अपने परिजनों के साथ केंद्र में उपस्थित हुए। वन स्टॉप सेंटर द्वारा दोनों पक्षों एवं उनके परिजनों की काउंसलिंग करते हुए समझाइश दी गई कि बचपन में की गई सगाई अथवा बाल विवाह बच्चों के भविष्य में अनेक सामाजिक एवं पारिवारिक समस्याओं का कारण बन सकता है। बालिग होने के बाद प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन एवं विवाह के संबंध में अपनी इच्छा और सहमति से निर्णय लेने का अधिकार है। किसी भी प्रकार का दबाव या जबरदस्ती उचित नहीं है।
दोनों पक्षों को प्रशासक द्वारा समझाइश दी गई कि आपसी विवाद को बढ़ाने के बजाय संवाद एवं समझदारी से समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। अनावेदक पक्ष को झगड़ा मांगने की प्रथा से दूर रहने साथ ही बाल सगाई बाल विवाह का कड़ा विरोध करने की सलाह दी गई तथा ऐसी किसी भी घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस प्रशासन अथवा महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचना देने के लिए प्रेरित किया गया। वन स्टॉप सेंटर की समझाइश एवं काउंसलिंग के सकारात्मक परिणामस्वरूप दोनों पक्षों के बीच सहमति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण बना। इस दौरान गोपाल ने स्वयं कहा कि यदि गीता उसके साथ विवाह नहीं करना चाहती है, तो उसे कोई आपत्ति नहीं है। गीता अपनी इच्छा एवं मर्जी से अपने जीवन का निर्णय ले सकती है। उसने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी ओर से अथवा उसके परिवार की ओर से न तो झगड़ा मांगा गया था और न ही भविष्य में किसी प्रकार की मांग की जाएगी।
इस प्रकार वन स्टॉप सेंटर (सखी) राजगढ़ की प्रभावी काउंसलिंग, समझाइश एवं सकारात्मक प्रयासों से बाल सगाई से उत्पन्न विवाद का शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण समाधान संभव हुआ। साथ ही दोनों पक्षों को बाल विवाह एवं बाल सगाई जैसी सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने का संदेश भी दिया गया।