सरपंच पर तीन माह के वेतन राजसात की कार्रवाई*
*कूप निर्माण संबंधी शिकायत की धारा 89 के तहत सुनवाई*
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*राजगढ़ 03 अक्टूबर, 2026*
ग्राम पंचायत कुंडीखेड़ा जनपद पंचायत ब्यावरा अंतर्गत कूप हितग्राही श्री दुर्गीलाल से संबंधित मजदूरी एवं सामग्री भुगतान में अनियमितता के संबंध में शिकायतकर्ता श्री जगदीश द्वारा प्रस्तुत शिकायत की धारा 89 के तहत सुनवाई की गई। प्रकरण की सुनवाई के दौरान उपलब्ध अभिलेखों, पोर्टल पर दर्ज जानकारी तथा संबंधित पक्षों द्वारा प्रस्तुत लिखित सहमति एवं साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। जांच के दौरान पाया गया कि कूप हितग्राही श्री दुर्गीलाल की लिखित सहमति के आधार पर जनपद पंचायत द्वारा कूप निर्माण की सामग्री राशि 80 हजार 750 रुपये वेंडर गौरव ट्रेडर्स, लखनवास को भुगतान की गई थी।
द्वारा उक्त राशि हितग्राही को उपलब्ध कराए जाने तथा सामग्री की राशि प्राप्त होने की पुष्टि हितग्राही द्वारा लिखित रूप से की गई है। इस आधार पर सामग्री राशि प्राप्त नहीं होने संबंधी शिकायत प्रमाणित नहीं पाई गई। इसी प्रकार कूप निर्माण कार्य में हितग्राही सहित अन्य जॉब कार्डधारी श्रमिकों के मस्टर रोल जारी किए जाकर उनके बैंक खातों में मजदूरी राशि का भुगतान किया गया।हितग्राही द्वारा भी लिखित रूप से स्वीकार किया गया कि उनके परिवार के सदस्यों द्वारा की गई मजदूरी की राशि प्राप्त हो चुकी है। हालांकि, बाद में शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं एवं अपने भाई को मजदूरी राशि प्राप्त नहीं होने की बात कही गई। पोर्टल पर उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण में मस्टर रोल में दर्ज श्रमिकों के बैंक खातों में मजदूरी राशि का अंतरण होना पाया गया।
प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर सरपंच एवं सचिव द्वारा मजदूरी राशि के गबन का आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता एवं सरपंच पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों एवं कथनों में भी विरोधाभास पाया गया, जिससे दोनों पक्षों के मध्य आपसी विवाद एवं रंजिश की स्थिति परिलक्षित हुई। प्रकरण में सरपंच द्वारा हितग्राही के साथ अपेक्षित व्यवहार एवं सहयोग नहीं किए जाने के संबंध में आंशिक दोष परिलक्षित होने पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा सरपंच के तीन माह के वेतन/मानदेय को राजसात करने की कार्रवाई की गई है। वहीं, प्रकरण की जांच एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर ग्राम पंचायत सचिव की ओर से कोई त्रुटि प्रमाणित नहीं पाई गई। प्रकरण में उपलब्ध अभिलेखों, प्रस्तुत साक्ष्यों एवं सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर प्रकट गुण-दोषों का परीक्षण करते हुए सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमानुसार आदेश पारित किया गया है।