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पौण्‍ड बायोफ्लॉक से देवबगस दांगी ने शुरू किया मत्स्य पालन, प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये का उत्पादन*

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पौण्‍ड बायोफ्लॉक से देवबगस दांगी ने शुरू किया मत्स्य पालन, प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये का उत्पादन*


 *कहानी बदलाव की* 


 


 *राजगढ़ 22 सितम्बर, 2026* 


ब्यावरा विकासखंड के ग्राम गिंदौरमना निवासी श्री देवबगस दांगी रोजगार की तलाश में थे, लेकिन उन्हें स्थायी रोजगार का अवसर नहीं मिल पा रहा था। इसी दौरान उनकी मुलाकात जिला मत्स्य अधिकारी से हुई, जहां उन्हें केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की जानकारी मिली। कम जलक्षेत्र में अधिक मत्स्य उत्पादन की तकनीक पौण्‍ड बायोफ्लॉक उन्हें उपयोगी लगी। योजना से प्रेरित होकर श्री देवबगस दांगी ने ग्राम गिन्‍दौरमीना में पौण्‍ड बायोफ्लॉक की दो यूनिट स्थापित कीं। इनकी कुल क्षमता 21 हजार फिंगरलिंग तथा लागत 28 लाख रुपये है। योजना के तहत उन्हें 11.20 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ।


दोनों यूनिट में 10,500 फिंगर लिंग का संचयन कर इंटेंसिव फिश फार्मिंग पद्धति अपनाई गई। बायोफ्लॉक तकनीक में प्रोबायोटिक का उपयोग किया जाता है, जिससे मत्स्य पालन के अवशिष्ट पदार्थ उपयोगी खाद्य में परिवर्तित होते हैं। इससे फीडिंग लागत कम होने के साथ कम जलक्षेत्र में अधिक मत्स्य उत्पादन संभव हुआ। इस तकनीक को अपनाने से श्री देवबगस दांगी को मत्स्य पालन में बेहतर उत्पादन प्राप्त हो रहा है और प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख रुपये की मछली का उत्पादन किया जा रहा है। पौण्‍ड बायोफ्लॉक तकनीक उनके लिए मत्स्य पालन को रोजगार और आय का प्रभावी माध्यम बनाने में सहायक बनी है।